हैदराबाद। तेलंगाना प्रदेश कांग्रेस कमेटी (TPCC) के जनरल सेक्रेटरी चनगानी दयाकर (Changani Dayakar) ने स्पष्ट किया है कि फोन टैपिंग जैसा गंभीर अपराध करने वाले किसी भी व्यक्ति को कानून के सामने जवाब देना ही पड़ेगा। उन्होंने कहा कि बीआरएस पार्टी के नेताओं की धमकियों से डरने वाली यह सरकार नहीं है। एक बयान में चनगानी दयाकर ने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव (केसीआर) के कार्यकाल में हुआ फोन टैपिंग मामला अत्यंत गंभीर और देश के लोकतांत्रिक मूल्यों पर हमला है। उन्होंने आरोप लगाया कि केसीआर द्वारा नियुक्त अधिकारियों के माध्यम से ही अवैध रूप से फोन टैपिंग करवाई गई।
एसआईटी जांच के लिए बुलाए जाने पर इतना हंगामा और घबराहट क्यों
उन्होंने सवाल उठाया कि यदि केसीआर निर्दोष हैं, तो एसआईटी जांच के लिए बुलाए जाने पर इतना हंगामा और घबराहट क्यों दिखाई जा रही है। उन्होंने कहा कि केसीआर के एसआईटी के सामने पेश होने से ऐसा माहौल बनाया जा रहा है मानो कोई प्रलय आ गई हो। चनगानी दयाकर ने कहा कि जनता की सरकार आने के बाद किसी भी प्रकार की राजनीतिक प्रतिशोध की कार्रवाई नहीं की गई है। इसके विपरीत, बीआरएस शासन के दौरान लोकतंत्र और स्वतंत्रता को कुचलते हुए सत्ता का दुरुपयोग किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि उस समय शासन बंधक लुटेरों की तरह चलाया गया और दस वर्षों तक जनता की आवाज को दबाया गया।
यदि किसी ने अपराध किया है, तो क्या उसकी जांच भी नहीं होनी चाहिए
उन्होंने कहा कि यदि किसी ने अपराध किया है, तो क्या उसकी जांच भी नहीं होनी चाहिए। फोन टैपिंग केवल एक प्रशासनिक गलती नहीं, बल्कि एक बहुत बड़ा अपराध है। बीआरएस नेताओं ने सत्ता जाने के बाद यह मान लिया था कि उनके सारे कृत्य माफ हो जाएंगे, लेकिन ऐसा नहीं होने वाला। उन्होंने आरोप लगाया कि फोन टैपिंग जैसे गंभीर मुद्दे पर बीआरएस नेता खुलकर बात करने की स्थिति में नहीं हैं और इसी कारण बौखलाहट में अनर्गल बयानबाजी कर रहे हैं।
अपनी भाषा और मर्यादा की सीमाओं में रहकर ही दें बयान
उन्होंने कहा कि जिन तकनीकों का इस्तेमाल माओवादी और आतंकवादी गतिविधियों पर नजर रखने के लिए किया जाता है, उन्हीं तरीकों का प्रयोग कांग्रेस पार्टी और विपक्षी नेताओं के खिलाफ किया गया। अंत में चनगानी दयाकर ने बीआरएस नेताओं को चेतावनी देते हुए कहा कि वे अपनी भाषा और मर्यादा की सीमाओं में रहकर ही बयान दें, क्योंकि कानून अपना काम करेगा और दोषियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।
क्या पुलिस हमारे फोन को टैप कर सकती है?
पुलिस किसी व्यक्ति का फोन टैप केवल कानून के तहत कर सकती है। भारत में टेलीग्राफ अधिनियम 1885 और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम 2000 के नियमों के तहत, जब पुलिस को राष्ट्रीय सुरक्षा, अपराध की जांच या गंभीर आपराधिक मामलों में जरूरत होती है, तभी न्यायालय या उच्च अधिकारी की अनुमति से फोन टैप किया जा सकता है। बिना अनुमति फोन टैप करना अवैध है और नागरिक की निजता का उल्लंघन माना जाता है।
फोन टैप करने की सजा क्या है?
अगर कोई व्यक्ति या संस्था बिना कानूनी अनुमति के किसी का फोन टैप करती है, तो इसे अपराध माना जाता है। भारत में इसके लिए कैद और जुर्माने की सजा हो सकती है। सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम के तहत, फोन टैप करने वाला 3 साल तक की जेल या जुर्माने के दायरे में आता है। गंभीर मामलों में दोनों सजा एक साथ भी दी जा सकती है।
क्या आपके फोन को टैप करना कानूनी है?
कानून के अनुसार, बिना अधिकृत अनुमति के किसी का फोन टैप करना पूरी तरह अवैध है। केवल अदालत या निर्धारित अधिकारी की अनुमति मिलने पर ही फोन को कानूनी तरीके से टैप किया जा सकता है। यदि कोई व्यक्ति अपने फोन को सुरक्षित रखना चाहता है, तो उसे सुरक्षा उपाय, एन्क्रिप्शन और सतर्क व्यवहार अपनाना चाहिए।
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