हैदराबाद। राज्य के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जुपल्ली कृष्ण राव ने शुक्रवार को केंद्रीय मंत्री जी. किशन रेड्डी (Union Minister G. Kishan Reddy) से तत्काल हस्तक्षेप करने और नाफेड (नेशनल एग्रीकल्चरल कोऑपरेटिव मार्केटिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड) के माध्यम से सोयाबीन की खरीद सुनिश्चित करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि असमय बारिश से फसलों को हुए नुकसान के कारण किसान गंभीर संकट का सामना कर रहे हैं। आदिलाबाद स्थित पेनगंगा गेस्ट हाउस में हुई बैठक के दौरान जुपल्ली कृष्ण राव (Jupally Krishna Rao) ने प्रभावित किसानों की मौजूदगी में केंद्रीय मंत्री को जमीनी हालात से अवगत कराया।
डिसकलरेशन के कारण खरीद में हो रही देरी
उन्होंने कहा कि सोयाबीन फसल का रंग बदल जाने (डिसकलरेशन) के कारण खरीद में देरी हो रही है, जिससे किसानों को कई दिनों तक मंडियों में इंतजार करना पड़ रहा है, जबकि गांवों में स्टॉक जमा होता जा रहा है। यदि केंद्र सरकार बिना देरी के खरीद शुरू नहीं करती है, तो किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) नहीं मिल पाएगा। इससे पहले दिन में मंत्री ने नेरडिगोंडा मार्केट यार्ड का औचक निरीक्षण किया, किसानों से बातचीत की और उन्हें राज्य सरकार की ओर से पूर्ण सहयोग का आश्वासन दिया। उन्होंने बताया कि कृषि मंत्री थुम्मला नागेश्वर राव पहले ही केंद्रीय कृषि मंत्रालय को पत्र लिखकर मामले में सकारात्मक और त्वरित प्रतिक्रिया देने का अनुरोध कर चुके हैं।
2025 में सोयाबीन का भाव क्या रहेगा?
अनुमान के अनुसार 2025 में सोयाबीन का भाव उत्पादन, मौसम, मांग-आपूर्ति और सरकारी नीतियों पर निर्भर करेगा। सामान्य मंडियों में इसका औसत दाम लगभग ₹4,500 से ₹6,000 प्रति क्विंटल के बीच रहने की संभावना मानी जाती है, हालांकि वास्तविक कीमत क्षेत्र के अनुसार बदल सकती है।
सोयाबीन का अंग्रेजी नाम क्या है?
इसे अंग्रेजी में Soybean कहा जाता है। वैज्ञानिक नाम Glycine max है। यह एक प्रमुख तिलहन और प्रोटीन युक्त फसल मानी जाती है, जिसका उपयोग तेल, पशु आहार और खाद्य उत्पादों में व्यापक रूप से किया जाता है।
100 किलो सोयाबीन से कितना तेल निकलता है?
औसतन 100 किलोग्राम सोयाबीन से लगभग 18 से 20 किलोग्राम तेल प्राप्त होता है। शेष भाग से सोया खली निकलती है, जिसका उपयोग पशु आहार और अन्य औद्योगिक उद्देश्यों में किया जाता है।
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