हैदराबाद। नामपल्ली स्थित फॉरेंसिक साइंस लैबोरेटरी (FSL) की निदेशक शिखा गोयल ने एफएसएल में हुई आग की घटना के बाद गलत जानकारी फैलाए जाने पर चिंता व्यक्त की है। मीडिया को संबोधित करते हुए उन्होंने बताया कि शनिवार सुबह 10:08 बजे आग लगी थी, जिसे दमकल विभाग ने दोपहर 1:30 बजे तक काबू में कर लिया। इस घटना में प्रयोगशाला, प्रशिक्षण कक्ष, पुस्तकालय और एचआरडी (HRD) कक्ष प्रभावित हुए हैं।

कारणों की जांच जारी
उन्होंने स्पष्ट किया कि आग लगने की शिकायत पुलिस में दर्ज करा दी गई है और कारणों की जांच जारी है। नुकसान का आकलन किया जा रहा है। शिखा गोयल ने यह भी खारिज किया कि आग में किसी महत्वपूर्ण मामले का सबूत नष्ट हुआ है। उन्होंने बताया कि संबंधित मामलों के सबूत पहले ही अदालत में पेश किए जा चुके हैं। उन्होंने कहा कि वर्ष 2024 तक सुरक्षित रखे गए 136 साक्ष्यों में से 129 साक्ष्य पहले ही न्यायालय को सौंपे जा चुके हैं, शेष भी सुरक्षित हैं।
एफएसएल जांच क्या होती है?
सामान्य तौर पर एफएसएल जांच फॉरेंसिक साइंस लैबोरेटरी द्वारा की जाने वाली वैज्ञानिक जांच होती है। इसमें अपराध से जुड़े सबूत जैसे खून, डीएनए, फिंगरप्रिंट, हथियार, दस्तावेज, मोबाइल, ऑडियो-वीडियो और केमिकल सैंपल की जांच की जाती है। इसका उद्देश्य यह पता लगाना होता है कि सबूत असली हैं या नहीं और अपराध से उनका क्या संबंध है।
एफएसएल टीम का फुल फॉर्म क्या है?
आधिकारिक रूप से एफएसएल का फुल फॉर्म Forensic Science Laboratory होता है। एफएसएल टीम में वैज्ञानिक, तकनीकी विशेषज्ञ और फॉरेंसिक अधिकारी शामिल होते हैं, जो अपराध से जुड़े साक्ष्यों का वैज्ञानिक विश्लेषण करते हैं। यह टीम पुलिस और अदालतों की मदद करती है, ताकि मामलों में तथ्यात्मक और तकनीकी साक्ष्य पेश किए जा सकें।
एफएसएल प्रमाणीकरण क्या है?
प्रक्रिया के रूप में एफएसएल प्रमाणीकरण वह रिपोर्ट होती है, जिसमें लैब द्वारा जांचे गए सबूतों की सत्यता और निष्कर्ष दर्ज किए जाते हैं। यह प्रमाण अदालत में कानूनी सबूत के रूप में स्वीकार किया जाता है। एफएसएल प्रमाणन से यह स्पष्ट होता है कि साक्ष्य के साथ छेड़छाड़ नहीं हुई और जांच वैज्ञानिक मानकों के अनुसार की गई है।
Read Telugu News: https://vaartha.com/
यह भी पढ़ें :