Telangana : शक्ति और शांति का संतुलन ही भारतीय परंपरा की असली पहचान – राव

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हैदराबाद। तेलंगाना बीजेपी अध्यक्ष एन. रामचंदर राव (N. Ramchander Rao) ने खम्मम स्थित सरस्वती शिशु मंदिर में का दौरा किया और वहाँ आयोजित आयुध पूजा कार्यक्रम में भाग लिया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि आयुध पूजा भारत की महान सभ्यतागत परंपरा को दर्शाती है, जिसमें शक्ति के प्रतीक अस्त्र-शस्त्रों की पूजा की जाती है। उन्होंने कहा कि यह परंपरा भारतीय संस्कृति में साहस, शक्ति और अनुशासन का प्रतीक है। आयुध पूजा (Ayudha Puja) के महत्व पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि भारतीय सभ्यता हमेशा से शांति, सद्भाव, ज्ञान और धर्म के मार्ग पर चलने वाली रही है।

सरस्वती शिशु मंदिर में हुई आयुध पूजा

भारत ने कभी किसी पर आक्रमण की नीति नहीं अपनाई, लेकिन हमारी संस्कृति यह भी सिखाती है कि आवश्यकता पड़ने पर धर्म की रक्षा के लिए हमें मजबूत, साहसी और तैयार रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि शक्ति और शांति का संतुलन ही भारतीय परंपरा की असली पहचान है। कार्यक्रम खम्मम में आयोजित किया गया, जहाँ बड़ी संख्या में विद्यार्थी, शिक्षक और कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

शक्ति संतुलन कितने प्रकार के होते हैं?

राजनीति विज्ञान में शक्ति संतुलन मुख्यतः पांच प्रकार के माने जाते हैं। पहला — द्विध्रुवीय संतुलन, जिसमें दो महाशक्तियां आमने-सामने होती हैं जैसे शीत युद्ध में अमेरिका और सोवियत संघ। दूसरा — बहुध्रुवीय संतुलन, जिसमें कई राष्ट्र मिलकर शक्ति को संतुलित करते हैं। तीसरा — स्वचालित संतुलन, चौथा — कृत्रिम या निर्मित संतुलन, और पांचवां — क्षेत्रीय शक्ति संतुलन।

शक्ति और संतुलन का क्या अर्थ है?

राजनीति में “शक्ति” का अर्थ है किसी राष्ट्र, संस्था या व्यक्ति की दूसरों को प्रभावित करने या नियंत्रित करने की क्षमता — चाहे वह सैन्य, आर्थिक या कूटनीतिक हो। “संतुलन” का अर्थ है कि कोई एक पक्ष इतना शक्तिशाली न हो जाए कि दूसरों पर एकतरफा प्रभुत्व स्थापित कर सके। दोनों मिलकर अंतरराष्ट्रीय संबंधों में स्थिरता और शांति बनाए रखने का साधन बनते हैं।

शक्ति संतुलन का क्या अर्थ है?

अंतरराष्ट्रीय राजनीति की यह अवधारणा बताती है कि राष्ट्र इस प्रकार गठबंधन और नीतियां बनाते हैं जिससे कोई एक देश या गुट सर्वशक्तिमान न बन सके। इसका उद्देश्य युद्ध को रोकना और राष्ट्रों की संप्रभुता की रक्षा करना है। यूरोप में 19वीं सदी की कांग्रेस प्रणाली और शीत युद्ध काल इसके प्रमुख उदाहरण हैं। हंस मॉर्गेंथाऊ जैसे विद्वानों ने इसे यथार्थवादी राजनीति का आधार माना है।

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Ajay Kumar Shukla

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Ajay Kumar Shukla

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