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Handloom: दो हथकरघा कारीगरों को केंद्र से पुरस्कार

Ajay Kumar Shukla
Ajay Kumar Shukla
Handloom: दो हथकरघा कारीगरों को केंद्र से पुरस्कार

हैदराबाद। केंद्रीय हथकरघा एवं वस्त्र मंत्रालय (Union Ministry) ने हथकरघा क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रतिभा दिखाने वालों के लिए वर्ष 2024 के हथकरघा पुरस्कारों (Awards)की घोषणा की है। इस वर्ष, केंद्र ने 24 लोगों के लिए पुरस्कारों की घोषणा की है, जिनमें पाँच संत कबीर पुरस्कार और 19 राष्ट्रीय हथकरघा पुरस्कार शामिल हैं।

पुरस्कारों के लिए पवन कुमार और गजम नर्मदा का चयन

पुरस्कारों के लिए कुल 19 लोगों का चयन किया गया है, जिनमें से दो तेलंगाना राज्य से चुने गए हैं। युवा हथकरघा श्रेणी में पवन कुमार और विपणन श्रेणी में गजम नर्मदा (नरेंद्र हथकरघा) कोठापेट को राज्य से पुरस्कारों के लिए चुना गया है। ये पुरस्कार 11वें राष्ट्रीय हथकरघा दिवस समारोह के अवसर पर 7 अगस्त को नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित एक समारोह में भारत के राष्ट्रपति द्वारा प्रदान किए जाएँगे

दोनों पुरस्कार विजेता यदाद्री भुवनगिरी जिले के

उल्लेखनीय है कि दोनों पुरस्कार विजेता यदाद्री भुवनगिरी जिले के नारायणपुरम मंडल के पुट्टपका से हैं। गुडा पवन ने रेशम के धागे में प्राकृतिक रंगों का इस्तेमाल करके जीआई टैग वाली तेलिया रुमाल डिज़ाइन वाली रेशमी साड़ी बुनी है। ये साड़ियाँ प्राचीन परंपरा को दर्शाती हैं और मुलायम, बिना झुर्रियों वाले डिज़ाइन से बनी हैं।

2024 की मार्केटिंग श्रेणी में सम्मानित हो चुकी है नर्मदा

वहीं, पुट्टपका गाँव की गजम नर्मदा हैदराबाद में नरेंद्र हैंडलूम्स नाम से कारोबार करती हैं। हथकरघों की बिक्री से उनका सालाना कारोबार 8 करोड़ रुपये का है। इसी के साथ, उन्हें केंद्र सरकार द्वारा घोषित पुरस्कार, 2024 की मार्केटिंग श्रेणी में सम्मानित किया गया।

हथकरघा का हिंदी में क्या अर्थ है?

Handloom एक ऐसा करघा (बुनाई की मशीन) होता है जो हाथों से चलाया जाता है, यानी इसमें बिजली या मशीन की जरूरत नहीं होती। इसमें कपड़े को हाथ से बुना जाता है। यह पारंपरिक और शिल्प आधारित तकनीक होती है, जिससे स्थानीय बुनकर विभिन्न प्रकार के कपड़े जैसे खादी, साड़ी, दुपट्टा, आदि बनाते हैं।

हथकरघा का इतिहास क्या है?

यह भारत की प्राचीन सांस्कृतिक धरोहर है और इसकी शुरुआत सिंधु घाटी सभ्यता (लगभग 5000 साल पहले) से मानी जाती है। उस समय लोग सूत कातने और हाथ से बुनाई करने की कला में दक्ष थे।

  • मौर्य और गुप्त काल में बुनाई और वस्त्र निर्माण एक विकसित उद्योग बन चुका था।
  • मुगल काल में हथकरघा उद्योग ने चरम पर पहुँचकर रेशमी और कढ़ाईदार वस्त्र बनाए।
  • ब्रिटिश शासन के दौरान यह उद्योग प्रभावित हुआ क्योंकि अंग्रेजों ने मशीन से बने वस्त्रों को बढ़ावा दिया और भारतीय हथकरघा को कमजोर किया।
  • लेकिन महात्मा गांधी ने स्वतंत्रता संग्राम के दौरान खादी और हथकरघा को आत्मनिर्भरता का प्रतीक बनाया।

हथकरघा दिवस क्यों मनाया जाता है?

National Handloom Day हर साल 7 अगस्त को मनाया जाता है।

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