हैदराबाद। भारतीय राष्ट्र समिति (BRS) ने राजस्व मंत्री पोंगुलेटी श्रीनिवास रेड्डी के खिलाफ भ्रष्टाचार और अवैध खनन के आरोपों के चलते तत्काल बर्खास्तगी की मांग की है। बीआरएस के कार्यकारी अध्यक्ष के.टी. रामाराव (केटीआर) ने चेतावनी दी कि यदि सरकार कार्रवाई करने में विफल रहती है, तो पार्टी औपचारिक शिकायत के साथ राज्यपाल के पास जाएगी और आवश्यक होने पर इस मुद्दे को बड़े पैमाने पर सीधे जनता के समक्ष ले जाएगी। केटीआर ने मंत्री पर गंभीर आरोप लगाए और कहा कि बीआरएस विधानसभा दल के उपनेता टी. हरीश राव (T. Harish Rao) द्वारा किए गए खुलासों के बाद सरकार हिल गई है। उन्होंने कहा कि हरीश राव ने सरकारी दस्तावेज़ों के आधार पर एक बड़े घोटाले का खुलासा किया, जिसमें राज्य सरकार के नंबर 2 दर्जे के एक वरिष्ठ मंत्री का नाम शामिल है।
कंपनी ने नियमों का किया उल्लंघन
मंत्री के परिवार से जुड़े कंपनी ने नियमों का उल्लंघन किया और अवैध खनन गतिविधियों में संलिप्त पाया गया। केटीआर ने सवाल किया कि अन्य कंपनियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई क्यों की गई, लेकिन राघव कंस्ट्रक्शंस के खिलाफ कोई कार्रवाई क्यों नहीं हुई। उन्होंने संदेह जताया कि क्या इस निष्क्रियता का कारण मंत्री के साथ कंपनी का संबंध है या मुख्यमंत्री की स्वयं की संलिप्तता। केटीआर ने कहा कि हरीश राव के खुलासे के बाद मुख्यमंत्री ने स्वीकार किया कि वास्तव में अनियमितताएँ हुई थीं। लेकिन जिम्मेदारी लेने के बजाय उन्होंने यह दावा किया कि यह मुद्दा सरकार ने स्वयं उजागर किया। केटीआर ने मुख्यमंत्री के इस कथन की आलोचना की कि कंपनी ‘मंत्री पोंगुलेटी के दूर के रिश्तेदारों’ की है, इसे असंगत और अविश्वसनीय बताया।
मंत्री की पत्नी, पुत्र और भाई सीधे कंपनी से जुड़े हैं
केटीआर ने कहा कि मंत्री की पत्नी, पुत्र और भाई सीधे कंपनी से जुड़े हैं और मंत्री स्वयं 2020 से 2022 तक इसके चेयरमैन रहे। उन्होंने मुख्यमंत्री के विरोधी और भ्रामक बयानों को सरकार की विश्वसनीयता की कमी के रूप में देखा। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री का राघव कंस्ट्रक्शंस की मजबूत रक्षा करना उनके स्वयं के संलिप्त होने का संकेत है। उन्होंने कोडंगल लिफ्ट इरिगेशन प्रोजेक्ट के तहत उसी कंपनी को अनुबंध आवंटित किए जाने और राज्य में बड़े पैमाने पर भूमि अनियमितताओं पर चिंता जताई।
केटीआर ने खनन मंत्री की 4 लाख रुपए की मामूली समस्या बताने वाली टिप्पणी की भी आलोचना की और कहा कि निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने केवल एक दिन में 32 लाख रुपए के उल्लंघन पाए, जिससे यह स्पष्ट होता है कि यह लंबी अवधि तक चलने वाला बड़ा घोटाला है। केटीआर ने कहा कि एक अन्य कंपनी, भग्यलक्ष्मी माइनिंग, जो कोकापेट में स्थित है, मुख्यमंत्री के करीबी रिश्तेदार से जुड़ी है।
सरकार राजस्व में वृद्धि का दावा कर रही
उन्होंने खनन राजस्व में अंतर पर सवाल उठाया और कहा कि जबकि सरकार राजस्व में वृद्धि का दावा कर रही है, वास्तविकता में 1,700–1,800 करोड़ रुपए की अपेक्षा के बजाय केवल लगभग 900 करोड़ ही प्राप्त हो रहे हैं, जिससे फंड के गबन की गंभीर चिंता है। बीआरएस ने मंत्री, मुख्यमंत्री और अन्य संबंधितों की भूमिका की जांच के लिए एक हाउस कमिटी के गठन की मांग की। उन्होंने कहा कि पहले भी ओबुलापुरम खनन मामले जैसी घटनाओं की पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए हाउस कमिटी द्वारा जांच की गई थी। केटीआर ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की भी आलोचना की कि उसने जिम्मेदार विपक्ष के रूप में काम नहीं किया और आरोप लगाया कि विधानसभा में इसके सदस्य सरकार का समर्थन करते दिखे।
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