वनदेवताओं की जातरा में बच्चों और दिव्यांगों को सुरक्षा
हैदराबाद। एशिया महाद्वीप (Asia) की सबसे बड़ी जनजातीय जातरा के रूप में प्रसिद्ध मेदारम सम्मक्का–सारलम्मा महा जातरा में श्रद्धालुओं के साथ आने वाले छोटे बच्चों और दिव्यांगों के यदि बिछड़ जाने की स्थिति में उनकी पहचान तुरंत कर उन्हें सुरक्षित रूप से माता-पिता तक पहुँचाने में चिल्ड्रन ट्रैकिंग एंड मॉनिटरिंग सिस्टम (CTMS) के रिस्ट बैंड अत्यंत प्रभावी रूप से कार्य करेंगे। यह बात राज्य के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) बी. शिवधर रेड्डी ने कही। शनिवार को अपने कार्यालय में आयोजित एक कार्यक्रम में डीजीपी ने वोडाफोन आइडिया लिमिटेड के सहयोग से तैयार किए गए इस नवीन क्यूआर-कोड आधारित रिस्ट बैंड और संबंधित पोस्टरों का औपचारिक रूप से उद्घाटन किया।
डीजीपी बी. शिवधर रेड्डी ने सीटीएमएस का शुभारंभ किया
इस अवसर पर डीजीपी ने कहा कि इस माह की 28 से 31 तारीख तक मुलुगु जिले में अत्यंत भव्य रूप से आयोजित होने वाली मेदारम जातरा में तेलंगाना के साथ-साथ महाराष्ट्र, ओडिशा, आंध्र प्रदेश और छत्तीसगढ़ से लाखों श्रद्धालु शामिल होंगे। इतनी भारी भीड़ में छोटे बच्चों, बुज़ुर्गों और दिव्यांगों के बिछड़ने की आशंका रहती है। पूर्व अनुभवों को ध्यान में रखते हुए उनकी सुरक्षा को मजबूत करने के उद्देश्य से यह तकनीक अपनाई गई है। उन्होंने बताया कि एसआईबी आईजीपी बी. सुमति ने पिछले डेढ़ महीने से कड़ी मेहनत कर इस प्रणाली को तैयार किया है और इसके निर्माण में वोडाफोन प्रबंधन द्वारा दिए गए सहयोग की सराहना की। महिला सुरक्षा विभाग की डीजीपी चारु सिंहा की निगरानी में इस व्यवस्था को जातरा में पूरी तरह लागू किया जाएगा।
पहनाया जाएगा एक विशेष क्यूआर कोड रिस्ट बैंड
डीजीपी ने यह भी कहा कि भविष्य में महाकुंभ मेला जैसे अन्य बड़े आयोजनों में भी इस प्रणाली का उपयोग किया जा सकता है। सीटीएमएस प्रणाली के तहत जातरा में आने वाले बच्चों और दिव्यांगों का विवरण दर्ज कर उनके हाथ में एक विशेष क्यूआर-कोड रिस्ट बैंड पहनाया जाएगा। इसके लिए राज्यभर में 11 विशेष केंद्र स्थापित किए गए हैं। इन केंद्रों पर मौजूद टीमें बच्चों का नाम, माता-पिता का विवरण और फोन नंबर दर्ज करेंगी। यदि कोई व्यक्ति बिछड़ा हुआ मिलता है, तो वहां मौजूद स्वयंसेवक या पुलिसकर्मी अपने स्मार्टफोन से रिस्ट बैंड पर लगे क्यूआर कोड को स्कैन करेंगे। तुरंत माता-पिता या अभिभावकों के फोन नंबर और डायल-100 की जानकारी दिखाई देगी। इससे तुरंत परिवार को सूचित कर उस व्यक्ति को सुरक्षित रूप से सौंपा जा सकेगा। इसके बाद परिवार से मिलन की फोटो भी सिस्टम में अपलोड की जाएगी।
25,000 रिस्ट बैंड उपलब्ध कराए गए
इस कार्यक्रम के लिए कुल 25,000 रिस्ट बैंड उपलब्ध कराए गए हैं। ये 27 से 31 जनवरी तक 24 घंटे कार्यरत 11 केंद्रों पर उपलब्ध रहेंगे। ये केंद्र हनमकोंडा हयग्रीवाचारी ग्राउंड, हैदराबाद के उप्पल बस स्टेशन, एमजीबीएस, करीमनगर, परकाल, पेद्दापल्ली, मंथनी, एतूरुनागरम, कातराम बस स्टेशनों तथा वारंगल और काजीपेट रेलवे स्टेशनों में स्थापित किए गए हैं। इन क्षेत्रों से आने वाले श्रद्धालु इस सुविधा का लाभ उठा सकते हैं। स्थानीय पुलिस, महिला सुरक्षा विभाग और टीजीएसआरटीसी कर्मचारियों के समन्वय से यह प्रक्रिया संचालित की जाएगी। डीजीपी ने जनता से अपील की कि यदि कोई क्यूआर-कोड रिस्ट बैंड पहने व्यक्ति अकेला दिखाई दे तो तुरंत पुलिस को सूचित करें। इस कार्यक्रम में अतिरिक्त डीजीपी महेश एम. भगवत, चारु सिन्हा, डी.एस. चौहान, आईजीपी चंद्रशेखर रेड्डी, बी. सुमति, डॉ. गजरावु भूपाल सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
चाइल्ड ट्रैकिंग सिस्टम क्या है?
सुरक्षा के उद्देश्य से बच्चों की लोकेशन पर नज़र रखने वाली तकनीक को यह कहा जाता है। इसमें जीपीएस, मोबाइल नेटवर्क या इंटरनेट की मदद से बच्चे की वर्तमान स्थिति, आवाजाही और आपात स्थिति की जानकारी अभिभावकों तक पहुंचाई जाती है।
एंड्रॉइड के लिए चाइल्ड ट्रैकिंग ऐप क्या है?
मोबाइल सुरक्षा से जुड़े कई एप्लिकेशन उपलब्ध हैं, जो माता-पिता को रियल-टाइम लोकेशन, जियो-फेंसिंग और अलर्ट जैसी सुविधाएं देते हैं। ऐसे ऐप्स खास तौर पर बच्चों की सुरक्षा और निगरानी के लिए बनाए जाते हैं।
क्या मुझे अपने बच्चे पर ट्रैकर लगाने की अनुमति है?
कानूनी रूप से अभिभावक अपने नाबालिग बच्चे की सुरक्षा के लिए ट्रैकिंग का उपयोग कर सकते हैं। हालांकि पारदर्शिता और बच्चे की उम्र के अनुसार सहमति रखना बेहतर माना जाता है, ताकि भरोसा बना रहे और निजता का सम्मान भी हो।
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