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Modi Government : क्यों TDP को गवर्नर की कुर्सी मिली

Surekha Bhosle
Surekha Bhosle
Modi Government : क्यों TDP को गवर्नर की कुर्सी मिली

11 साल की मोदी सरकार में NDA का पहला राज्यपाल

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने तीन महत्वपूर्ण राज्यपाल नियुक्तियां की हैं, जिनमें से (TDP) नेता अशोक गजपति राजू को गोवा का राज्यपाल नियुक्त किया गया है. यह नियुक्ति (NDA) घटक दलों के साथ सरकार के मजबूत संबंधों को दर्शाती है. अन्य नियुक्तियों में प्रोफेसर असीम कुमार घोष (हरियाणा) और कविंद्र गुप्ता (लद्दाख) शामिल हैं. सरकार की तीन नियुक्तियों में से सबसे ज्यादा चर्चा अशोक गजपति राजू की हो रही है जो कि टीडीपी से हैं

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने टीडीपी TDP नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री पुसापति अशोक गजपति राजू को गोवा का नया राज्यपाल नियुक्त किया है. इसके अलावा दो और नियुक्तियां हुई जिसमें प्रोफेसर असीम कुमार घोष को हरियाणा का राज्यपाल तो जम्मू-कश्मीर के पूर्व डिप्टी सीएम कविंदर गुप्ता को केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख का उपराज्यपाल बनाया गया है. इन तीनों नामों में दो तो बीजेपी से ताल्लुक रखते हैं जबकि गजपति राजू टीडीपी से हैं. मोदी सरकार के 11 साल के कार्यकाल में ऐसा पहली बार देखने को मिला है जब किसी गैर बीजेपी नेता लेकिन एनडीए में शामिल सहयोगी दल के नेता को राज्यपाल बनाया गया है.

टीडीपी TDP नेता अशोक गजपति राजू की गिनती पार्टी के कद्दावर और सीनियर नेताओं में होती है. उनकी सीनियरिटी का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि वो सात बार विधायक रह चुके हैं. इसके अलावा पार्टी में राज्य के साथ-साथ राष्ट्रीय स्तर की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं. यहां तक राजू 2014 में मोदी कैबिनेट का हिस्सा भी रहे और करीब चार साल तक पीएम मोदी की टीम के रूप में काम भी कर चुके हैं. हालांकि, मोदी के पहले कार्यकाल के अंत में आंध्र प्रदेश के विशेष दर्जे की मांग तेज हो गई थी जिसके बाद राजू को मोदी सरकार से इस्तीफा भी देना पड़ा था.

मोदी सरकार में नंबर पर दो पर है चंद्रबाबू की टीडीपी

पिछले साल यानी 2024 के लोकसभा में मोदी सरकार की लगातार तीसरी बार केंद्र में वापसी जरूरी हुई, लेकिन पहले की तुलना में सरकार उतनी ताकतवर नहीं रही. 2014 और 2019 में पूर्ण बहुमत के साथ सरकार बनाने वाली बीजेपी 2024 में 240 सीटों पर सिमट कर रह गई जबकि सरकार बनाने के लिए 272 का आंकड़ा चाहिए था. ऐसे में एनडीए में शामिल घटक दलों की भूमिका अहम हो गई है. एनडीए में वैसे तो कई दल शामिल हैं, लेकिन इसमें बीजेपी के बाद अगर दूसरे नंबर पर कोई पार्टी है तो वो चंद्रबाबू नायडू की टीडीपी है.

बीजेपी और टीडीपी TDP के बीच आंध्र प्रदेश के लिए विशेष राज्य को लेकर जो नाराजगी थी उसे भूलते हुए 2024 में एक साथ चुनाव लड़ा और टीडीपी के हिस्से 16 सीटें आईं. बीजेपी अपने दम पर 272 के आंकड़े तक जब पहुंच नहीं पाई तो उसमें टीडीपी का साथ उसे फायदेमंद साबित हुआ. हालांकि, इसमें बिहार में नीतीश कुमार की पार्टी जेडीयू ने भी अहम भूमिका निभाई. क्योंकि एनडीए में सीट के आधार पर जेडीयू तीसरे नंबर पर रही. जेडीयू के हिस्से 12 सीटें आईं. जब बीजेपी की सीटें कम हो गईं तो सरकार में टीडीपी और जेडीयू की भूमिका अहम हो गई.

पहली बार नियुक्ति की पीछे की असर वजह

यह कह सकते हैं कि टीडीपी TDP और जेडीयू मोदी सरकार के दो सबसे अहम पिलर हैं. ऐसे में सरकार जब भी कोई काम करेगी तो इनका साथ होना और इनको साथ लेकर चलना जरूरी है. उसमें भी टीडीपी को तो नाराज नहीं किया जा सकता है. इसलिए मोदी सरकार की ओर से शायद पहली बार ऐसा हुआ है जब एनडीए के घटक दल के नेताओं को राज्यपाल की नियुक्ति में शामिल किया गया है. गजपति राजू की नियुक्ति से सरकार अपने सहयोगियों को ये संदेश भी देने की कोशिश की है कि वो अपने घटक दलों के साथ खड़ी है. बिहार में अगले कुछ महीने में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं, चुनाव के बाद राज्य की सियासत क्या होगी कोई नहीं जानता है.

संसद के मॉनसून सत्र से पहले संदेश देने की कोशिश

गजपति राजू को गोवा का राज्यपाल नियुक्त कर सरकार ने अपने सहयोगियों को यह भी संदेश देने का काम किया है कि केंद्र में किसी की अनदेखी नहीं हो रही है. संसद का मॉनसून सत्र भी शुरू होने वाला है, ऐसी स्थिति में सरकार की पूरी कोशिश यही है कि कम से कम एनडीए के घटक दलों के नेताओं को एक सूत्र में पिरो कर रखा जाए. खासकर आंध्र प्रदेश में टीडीपी की चंद्रबाबू नायडू के लिए तो ये सरकार बजट में भी अपना खजाना खोल दिया था.

कौन हैं हरियाणा के नए राज्यपाल असीम घोष?

प्रोफेसर असीम घोष को हरियाणा का नया राज्यपाल नियुक्त किया गया है. वे एक वरिष्ठ नेता, शिक्षाविद और पश्चिम बंगाल बीजेपी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष रह चुके हैं. 1944 में हावड़ा (पश्चिम बंगाल) में जन्मे घोष ने कोलकाता के विद्यासागर कॉलेज से पॉलिटिकल साइंस में ग्रेजुएशन किया है. उन्होंने 1991 में भारतीय जनता पार्टी का दामन थामा और पार्टी में तेजी से उभरे. 1999 से 2002 तक वे पश्चिम बंगाल बीजेपी के अध्यक्ष रहे और इस दौरान उन्होंने राज्य में पार्टी की जमीनी पकड़ मजबूत करने में अहम भूमिका निभाई.

कौन हैं लद्दाख के नए उपराज्यपाल?

बीजेपी के वरिष्ठ नेता कविंदर गुप्ता को लद्दाख का नया उपराज्यपाल नियुक्त किया गया है. वे पूर्व में जम्मू-कश्मीर राज्य के अंतिम उपमुख्यमंत्री रह चुके हैं और राज्य विधानसभा के पहले बीजेपी अध्यक्ष भी बने थे. कविंदर गुप्ता 2005 से 2010 तक जम्मू नगर निगम के महापौर भी रहे, जो एक रिकॉर्ड है. उनका संबंध राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से रहा है. आपातकाल के दौरान उन्होंने 13 महीने जेल भी काटी. इसके अतिरिक्त, वे विश्व हिंदू परिषद की पंजाब इकाई के सचिव और भारतीय युवा मोर्चा (बीजेपी की युवा शाखा) की जम्मू-कश्मीर इकाई के प्रमुख भी रह चुके हैं.

TDP Party किसकी है?

तेलुगु देशम पार्टी ( टीडीपी ; अनुवाद: तेलुगु भूमि की पार्टी ) एक भारतीय क्षेत्रीय राजनीतिक दल है जो मुख्य रूप से आंध्र प्रदेश और तेलंगाना राज्यों में सक्रिय है। इसकी स्थापना तेलुगु सिनेमा के दिग्गज एनटी रामाराव (एनटीआर) ने 29 मार्च 1982 को की थी और इसने तेलुगु लोगों के समर्थन पर ध्यान केंद्रित किया है।

टीडीपी किस राज्य में है?

तेलुगु देशम पार्टी (टीडीपी; अनुवाद: तेलुगु भूमि की पार्टी) भारत में एक राजनीतिक समूह है जो मुख्य रूप से आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में काम करता है।

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