लाल धातु ने निवेशकों को किया मालामाल
नई दिल्ली: नई दिल्ली में कमोडिटी बाजार की तस्वीर इस साल तेजी से बदली है। सोना-चांदी के साथ-साथ तांबे(Copper) ने भी निवेशकों को शानदार रिटर्न दिया है। एआई यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस(AI) से जुड़े डेटा इंफ्रास्ट्रक्चर की बढ़ती मांग ने तांबे की कीमतों को नई ऊंचाइयों तक पहुंचा दिया है। वैश्विक बाजार में इसकी कीमत 12,000 डॉलर प्रति मीट्रिक टन के करीब पहुंच चुकी है, जिसने निवेशकों का ध्यान खींचा है।
इस साल अब तक तांबे(Copper) की कीमतों में करीब 35 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई है, जो 2009 के बाद सबसे बेहतरीन सालाना प्रदर्शन माना जा रहा है। शुक्रवार को कीमत 11,952 डॉलर प्रति टन तक पहुंची। अमेरिका के बाहर सप्लाई को लेकर चिंता और इंडोनेशिया(Indonesia) की खदानों में आई रुकावटों ने बाजार को और गर्म किया है।
एआई और बिजली मांग का असर
तांबे(Copper) की सबसे बड़ी ताकत इसकी बिजली संचालन क्षमता है। पावर ग्रिड, डेटा सेंटर, इलेक्ट्रिक वाहन और क्लीन एनर्जी प्रोजेक्ट्स में इसका व्यापक इस्तेमाल होता है। दुनिया भर में बिजली नेटवर्क को आधुनिक बनाने के लिए भारी निवेश किया जा रहा है, जिससे तांबे की मांग लगातार बढ़ रही है।
डेटा सेंटर और रिन्यूएबल एनर्जी प्रोजेक्ट्स को स्थिर और उच्च मात्रा में बिजली चाहिए। इसलिए तांबा इन सेक्टरों की रीढ़ बन गया है। हालांकि वैश्विक अर्थव्यवस्था में उतार-चढ़ाव बना रहता है, फिर भी एआई आधारित इंफ्रास्ट्रक्चर की जरूरतें तांबे की मांग को मजबूत बनाए हुए हैं।
निवेश और ईटीएफ का बढ़ता आकर्षण
एआई ने कमोडिटी निवेश की रणनीति भी बदल दी है। विशेषज्ञों के अनुसार, जो निवेशक एआई से जुड़े सेक्टर में पैसा लगा रहे हैं, वे डेटा सेंटर के लिए जरूरी हार्ड एसेट्स पर भी दांव लगा रहे हैं। इसमें तांबे से जुड़े ईटीएफ और अन्य वित्तीय उत्पाद शामिल हैं।
इस ट्रेंड का असर नए निवेश साधनों में साफ दिखता है। कनाडा की एक एसेट मैनेजमेंट कंपनी द्वारा लॉन्च किए गए फिजिकल कॉपर ईटीएफ ने इस साल करीब 46 प्रतिशत का रिटर्न दिया है। इसलिए निवेशक अब सिर्फ पारंपरिक धातुओं तक सीमित नहीं रहना चाहते।
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सप्लाई संकट और आगे की राह
तांबे की सप्लाई में कमी आने वाले समय में बड़ी चुनौती बन सकती है। सर्वे बताते हैं कि इस साल बाजार में एक लाख टन से ज्यादा की कमी रह सकती है, जो अगले कुछ वर्षों में और बढ़ने का अनुमान है। उत्पादन में तकनीकी और सुरक्षा संबंधी दिक्कतें भी सप्लाई पर असर डाल रही हैं।
बड़ी माइनिंग कंपनियों ने भविष्य के लिए अपने उत्पादन अनुमान घटाए हैं। इससे संकेत मिलता है कि मांग और आपूर्ति के अंतर के कारण कीमतों में आगे भी मजबूती बनी रह सकती है।
तांबे की कीमतों में तेजी का मुख्य कारण क्या है
तांबे की कीमतों में उछाल का प्रमुख कारण एआई आधारित डेटा सेंटर, बिजली ग्रिड और क्लीन एनर्जी सेक्टर की बढ़ती मांग है। इसके साथ ही खदानों में उत्पादन रुकने और सप्लाई की कमी ने बाजार को और मजबूत किया है।
निवेशकों के लिए तांबा कितना फायदेमंद रहा
इस साल तांबे ने लगभग 35 प्रतिशत का रिटर्न दिया है, जबकि कुछ फिजिकल कॉपर ईटीएफ ने 45 प्रतिशत से ज्यादा की बढ़त दिखाई है। इससे साफ है कि तांबा निवेश के लिहाज से आकर्षक विकल्प बनकर उभरा है।
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