क्रिसमस से पहले बाजार की चाल
नई दिल्ली: साल 2025 में सोने(Gold) ने निवेशकों को चौंकाने वाली तेजी दिखाई है। घरेलू बाजार में सोने के दाम करीब 70 प्रतिशत तक बढ़ चुके हैं, लेकिन अब ऊंचे स्तर से हल्की गिरावट दर्ज की गई है। नई दिल्ली(New Delhi) में सर्राफा बाजार की गतिविधियों पर नजर डालें तो हाल के दिनों में कीमतें अपने रिकॉर्ड स्तर से फिसली हैं। विशेषज्ञ मानते हैं कि यह गिरावट स्थायी नहीं है, बल्कि मौसमी और वैश्विक कारणों से जुड़ी हुई है।
घरेलू बाजार में सोने(Gold) का उच्चतम स्तर 1,35,590 रुपये प्रति 10 ग्राम रहा, जहां से यह करीब 1,300 रुपये नीचे आया है। शुक्रवार को मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज(MCX) पर फरवरी गोल्ड फ्यूचर्स 1,34,206 रुपये पर बंद हुए। भारत में त्योहारों और वैश्विक संकेतों के कारण निवेशक फिलहाल सतर्क नजर आ रहे हैं, जिससे कीमतों में सीमित उतार-चढ़ाव दिख रहा है।
छुट्टियों का असर और बाजार की सुस्ती
क्रिसमस सप्ताह के चलते वैश्विक कमोडिटी बाजारों में कारोबार की रफ्तार धीमी हो गई है। कई अंतरराष्ट्रीय बाजारों में ट्रेडिंग घंटे घटा दिए गए हैं, जिससे वॉल्यूम कम रहने की संभावना है। इस माहौल में सोने की कीमतों में अचानक तेज हलचल की उम्मीद कम मानी जा रही है।
भारतीय एमसीएक्स में केवल एक दिन का अवकाश रहेगा, जबकि अमेरिकी बाजार सीमित समय के बाद फिर खुलेंगे। यूरोप और एशिया के कई प्रमुख बाजार बंद रहने से अंतरराष्ट्रीय संकेत कमजोर रह सकते हैं। हालांकि कम कारोबार के दौरान छोटी खबरें भी कीमतों को प्रभावित कर सकती हैं।
एक्सपर्ट की राय और संभावित दायरा
ऑगमोंट की रिसर्च हेड रेनिषा चैनानी के अनुसार सोने की कीमतें फिलहाल अपने ऊंचे स्तर के आसपास टिक सकती हैं। उनका मानना है कि यदि कीमतें इस दायरे से बाहर जाती हैं तो 2 से 3 प्रतिशत का तेज उतार-चढ़ाव देखा जा सकता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि मौजूदा स्तर पर मुनाफावसूली के दबाव के बावजूद सोने की दीर्घकालिक मजबूती बनी हुई है। इसके अलावा निवेशक केंद्रीय बैंकों की नीतियों और वैश्विक अनिश्चितताओं पर भी नजर रखे हुए हैं।
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चांदी और वैश्विक संकेत
चांदी के बाजार में भी हालिया सत्र में मुनाफावसूली देखने को मिली है। मार्च कॉन्ट्रैक्ट्स में हल्की गिरावट दर्ज की गई, जिससे कीमतें अपने रिकॉर्ड स्तर से नीचे आईं। विश्लेषकों का मानना है कि यह गिरावट अस्थायी है और समर्थन स्तर मजबूत बना हुआ है।
भू-राजनीतिक तनाव, औद्योगिक मांग और केंद्रीय बैंकों के फैसले कीमती धातुओं को सहारा दे सकते हैं। अमेरिका और वेनेजुएला के बीच तनाव तथा जापान के केंद्रीय बैंक की ब्याज दर नीति से भी बाजार को संकेत मिल रहे हैं।
मौजूदा गिरावट निवेशकों के लिए क्या संकेत देती है
विशेषज्ञ इसे मुनाफावसूली का सामान्य चरण मानते हैं। लंबी अवधि के निवेशकों के लिए रुझान अभी भी सकारात्मक है। कीमतों में स्थिरता लौटने पर दोबारा तेजी देखी जा सकती है।
आने वाले हफ्तों में कौन से कारक अहम रहेंगे
वैश्विक बाजारों की छुट्टियों के बाद गतिविधि बढ़ेगी। केंद्रीय बैंकों की नीतियां दिशा तय कर सकती हैं। भू-राजनीतिक घटनाएं भी कीमतों पर असर डालेंगी।
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