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Gold: सोना-चांदी रिकॉर्ड स्तर पर

Dhanarekha
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Gold: सोना-चांदी रिकॉर्ड स्तर पर

निवेश और कीमतों में उछाल का विश्लेषण

नई दिल्ली: भारतीय सर्राफा बाजार में आज सोने(Gold) और चांदी ने अपने पिछले सभी रिकॉर्ड तोड़(Break Records) दिए हैं। चांदी की कीमत ₹2.32 लाख प्रति किलो के पार पहुंच गई है, जिसने इस साल 150% से अधिक का असाधारण रिटर्न दिया है। वहीं, सोने की कीमतें भी ₹1.38 लाख प्रति 10 ग्राम के करीब पहुंच गई हैं। पिछले 10 दिनों के भीतर चांदी में करीब ₹37,000 की भारी बढ़त देखी गई है, जो निवेशकों के लिए किसी जैकपॉट से कम नहीं है

कीमतों में तेजी के पीछे के वैश्विक कारण

सोने और चांदी की इन कीमतों में आग लगने के पीछे कई बड़े कारण हैं। सोने(Gold) के लिए, वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव (जैसे रूस-यूक्रेन युद्ध) और डॉलर की कमजोरी मुख्य कारण हैं। निवेशक(Investor) सुरक्षित निवेश के रूप में सोने की ओर भाग रहे हैं। चांदी के मामले में, औद्योगिक मांग (जैसे सोलर पैनल और इलेक्ट्रिक वाहन) और वैश्विक सप्लाई चैन में कमी ने इसकी कीमतों को आसमान पर पहुंचा दिया है। इसके अलावा, केंद्रीय बैंकों द्वारा भारी मात्रा में की जा रही खरीदारी भी कीमतों को सहारा दे रही है।

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खरीदते समय सावधानियां और भविष्य का अनुमान

विशेषज्ञों का मानना है कि यह तेजी अभी रुकने वाली नहीं है; साल के अंत तक चांदी ₹2.50 लाख और सोना ₹1.40 लाख तक पहुंच सकता है। हालांकि, खरीदारी करते समय ग्राहकों को बेहद सावधान रहना चाहिए। हमेशा BIS हॉलमार्क वाला सर्टिफाइड सोना(Gold) ही खरीदें ताकि शुद्धता की गारंटी रहे। साथ ही, अलग-अलग शहरों में मेकिंग चार्ज और टैक्स के कारण रेट अलग हो सकते हैं, इसलिए खरीदारी से पहले IBJA जैसे विश्वसनीय स्रोतों से मौजूदा रेट जरूर क्रॉस-चेक करें।

अलग-अलग शहरों में सोने और चांदी की कीमतों में अंतर क्यों होता है?

इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) द्वारा जारी रेट्स में 3% GST, ज्वेलर्स का अपना मार्जिन और मेकिंग चार्ज शामिल नहीं होते हैं। हर शहर के ज्वेलर्स अपने स्थानीय खर्चों और ट्रांसपोर्टेशन के आधार पर अलग मेकिंग चार्ज लेते हैं, जिसकी वजह से रिटेल मार्केट में कीमतें अलग-अलग दिखाई देती हैं।

चांदी की कीमतों में सोने के मुकाबले ज्यादा तेजी क्यों देखी जा रही है?

चांदी की तेजी का मुख्य कारण इसकी ‘इंडस्ट्रियल डिमांड’ है। आजकल सोलर पैनल, इलेक्ट्रॉनिक्स और इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) के निर्माण में चांदी का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल हो रहा है। इसके साथ ही, अमेरिकी कंपनियों द्वारा स्टॉक जमा करने की होड़ और उत्पादन में कमी के कारण चांदी(Gold) की मांग इसकी सप्लाई से कहीं ज्यादा हो गई है, जिससे इसके भाव 150% तक बढ़ गए हैं।

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