Telangana Assembly sessions : 29 दिसंबर से तेलंगाना विधानसभा का शीतकालीन सत्र शुरू होने जा रहा है, जिसके चलते राज्य की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। खास तौर पर इस बात को लेकर चर्चा है कि बीआरएस प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव (केसीआर) लंबे समय बाद विधानसभा सत्र में हिस्सा लेंगे या नहीं। राजनीतिक हलकों में माना जा रहा है कि कुछ शर्तों के साथ केसीआर विधानसभा आने को तैयार हैं।
करीब एक साल से विधानसभा से दूर रहे केसीआर इस बार पूरी रणनीति के साथ सदन में उतरने की तैयारी कर रहे हैं। एर्रावेली फार्महाउस में पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के साथ बैठक के दौरान उन्होंने विधायकों को सरकार के एजेंडे के मुताबिक रणनीति बदलते हुए कांग्रेस सरकार को घेरने के निर्देश दिए। बताया जा रहा है कि केसीआर ने कृष्णा जल विवाद पर पावर प्वाइंट प्रेजेंटेशन की अनुमति मिलने पर ही विधानसभा आने की शर्त रखी है।
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केसीआर ने यह भी संकेत दिए हैं कि विधानसभा सत्र को कम से (Telangana Assembly sessions)
कम 15 दिनों तक चलाने की मांग को मजबूती से उठाया जाए, ताकि जनहित के मुद्दों पर विस्तृत चर्चा हो सके। खासतौर पर पलामूर–रंगारेड्डी परियोजना को लेकर कांग्रेस सरकार पर दबाव बनाने की बीआरएस की योजना है। जरूरत पड़ने पर इस मुद्दे पर तकनीकी और तथ्यात्मक प्रस्तुति भी दी जा सकती है।
हाल ही में पार्टी बैठक में बोलते हुए केसीआर ने आरोप लगाया कि केंद्र और राज्य सरकारों की नीतियों के कारण तेलंगाना को, विशेष रूप से जल हिस्सेदारी के मामले में, भारी नुकसान हो रहा है। उन्होंने कांग्रेस पर तेलंगाना के हितों की अनदेखी करने का आरोप लगाया। सूत्रों के मुताबिक, विधानसभा सत्र के बाद बीआरएस जनता के बीच जाकर आंदोलन को और तेज करने की तैयारी में है। ऐसे में आने वाले दिनों में कांग्रेस और बीआरएस के बीच राजनीतिक टकराव और तेज होने की संभावना जताई जा रही है।
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