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Gold: सोने में नरमी और चांदी में रिकॉर्ड उछाल

Dhanarekha
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Gold: सोने में नरमी और चांदी में रिकॉर्ड उछाल

साप्ताहिक हलचल: सोने और चांदी की विपरीत दिशा

नई दिल्ली: इस बीते हफ्ते सराफा बाजार में सोने(Gold) और चांदी की चाल एक-दूसरे के विपरीत रही। जहां सोने की कीमतों में ₹3,174 की गिरावट(Decline) देखी गई और यह ₹1,34,782 प्रति 10 ग्राम पर आ गया, वहीं चांदी की चमक और बढ़ गई है। चांदी की कीमत में ₹6,443 की बड़ी बढ़त दर्ज की गई, जिससे यह अब ₹2.35 लाख प्रति किलो के करीब पहुंच गई है। निवेशकों के लिए यह हफ्ता मिला-जुला रहा, क्योंकि एक तरफ खरीदारी का मौका बना तो दूसरी तरफ लागत बढ़ गई

2025 का सफर: ऐतिहासिक रिटर्न और जबरदस्त बढ़त

साल 2025 सोने और चांदी के निवेशकों(Investors) के लिए ऐतिहासिक साबित हुआ है। पिछले एक साल में सोने(Gold) ने करीब 75% का रिटर्न दिया है, जबकि चांदी ने उम्मीदों से कहीं आगे बढ़ते हुए 167% की छलांग लगाई है। दिसंबर 2024 में जो चांदी ₹86,017 पर थी, वह दिसंबर 2025 के अंत तक ₹2.30 लाख के पार निकल गई। इस अभूतपूर्व तेजी के पीछे वैश्विक तनाव, डॉलर की कमजोरी और केंद्रीय बैंकों (जैसे चीन) द्वारा की गई सोने की भारी खरीदारी मुख्य कारण रहे हैं।

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भविष्य का अनुमान: क्या और बढ़ेंगे दाम?

विशेषज्ञों और केडिया एडवाइजरी के अनुसार, कीमतों में यह तेजी अभी थमने वाली नहीं है। औद्योगिक मांग, विशेषकर सोलर पैनल और इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) में चांदी के बढ़ते उपयोग के कारण इसकी कीमत इस साल ₹2.75 लाख तक जा सकती है। वहीं, सोने(Gold) की मांग में मजबूती को देखते हुए इसके भी साल के अंत तक ₹1.50 लाख प्रति 10 ग्राम के स्तर को पार करने की संभावना है। भू-राजनीतिक अस्थिरता और अमेरिकी टैरिफ नीतियों का डर बाजार को आगे भी गर्म रखेगा।

चांदी की कीमतों में सोने के मुकाबले इतनी अधिक तेजी (167%) क्यों आ रही है?

चांदी की कीमतों में इतनी बड़ी तेजी का मुख्य कारण इसकी इंडस्ट्रियल डिमांड है। अब चांदी केवल आभूषणों तक सीमित नहीं है; सोलर एनर्जी, इलेक्ट्रॉनिक्स और इलेक्ट्रिक वाहनों में यह एक अनिवार्य कच्चे माल के रूप में उभरी है। साथ ही, ग्लोबल सप्लाई में कमी और भविष्य में उत्पादन रुकने के डर से कंपनियां भारी स्टॉक जमा कर रही हैं, जिससे कीमतें बढ़ रही हैं।

सोने को सुरक्षित निवेश क्यों माना जा रहा है?

वैश्विक स्तर पर रूस-यूक्रेन युद्ध और अन्य भू-राजनीतिक तनावों के कारण शेयर बाजार और मुद्राओं में अस्थिरता रहती है। ऐसी स्थिति में निवेशक अपने पैसे को सुरक्षित रखने के लिए सोने(Gold) पर भरोसा करते हैं। इसके अलावा, अमेरिका में ब्याज दरों में कटौती और डॉलर के कमजोर होने से सोने की मांग वैश्विक स्तर पर बढ़ जाती है।

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