चांदी ₹2.45 लाख और सोना ₹1.37 लाख के करीब
नई दिल्ली: चांदी ने आज ₹2,44,788 प्रति किलो का नया शिखर छूकर इतिहास(Precious Metals) रच दिया है। इस जबरदस्त तेजी का मुख्य कारण चांदी का केवल आभूषण तक सीमित न रहकर एक अनिवार्य औद्योगिक धातु बनना है। सोलर पैनल, इलेक्ट्रिक वाहन (EV) और इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र में चांदी की भारी मांग है। इसके अलावा, वैश्विक स्तर पर सप्लाई चेन में आने वाली बाधाओं और अमेरिकी टैरिफ के डर से कंपनियों द्वारा किए जा रहे स्टॉक जमाव ने कीमतों को इस रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा दिया है।
सोने की चमक बरकरार और सुरक्षित निवेश का भरोसा

सोना भी ₹1,36,660 प्रति 10 ग्राम के स्तर पर पहुंच गया है, जो अपने ऑल-टाइम हाई(All Time High) के बेहद करीब है। 2025 में सोने(Precious Metals) की कीमतों में 75% की भारी वृद्धि देखी गई है। डॉलर की कमजोरी और वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव (जैसे रूस-यूक्रेन युद्ध) के कारण निवेशक सोने को सबसे सुरक्षित विकल्प मान रहे हैं। साथ ही, चीन जैसे देशों के केंद्रीय बैंकों द्वारा बड़े पैमाने पर सोने की खरीदारी ने बाजार में इसकी मांग और कीमत दोनों को ऊंचा बनाए रखा है।
अन्य पढ़े: सेंसेक्स 200 अंक फिसला, निफ्टी 50 अंक नीचे
भविष्य का अनुमान: क्या और बढ़ेंगे दाम?
बाजार विशेषज्ञों और केडिया एडवाइजरी के अनुसार, कीमतों में तेजी का यह सिलसिला रुकने वाला नहीं है। अनुमान है कि इस साल(Precious Metals) के अंत तक चांदी ₹2.75 लाख प्रति किलो और सोना ₹1.50 लाख प्रति 10 ग्राम के आंकड़े को पार कर सकता है। मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में बढ़ती होड़ और वैश्विक अस्थिरता को देखते हुए, कीमती धातुओं में निवेश फिलहाल सबसे आकर्षक और मुनाफे वाला सौदा नजर आ रहा है।
चांदी की कीमतों में सोने के मुकाबले ज्यादा प्रतिशत वृद्धि (167%) क्यों देखी जा रही है?
चांदी की कीमतों में इतनी बड़ी उछाल(Precious Metals) का मुख्य कारण इसकी दोहरी भूमिका है। सोना मुख्य रूप से निवेश और आभूषण के काम आता है, जबकि चांदी एक महत्वपूर्ण औद्योगिक कच्चा माल है। सोलर एनर्जी और इलेक्ट्रिक वाहनों की बढ़ती मांग के कारण चांदी की खपत तेजी से बढ़ी है, जबकि आपूर्ति सीमित है। इसी असंतुलन ने चांदी को सोने के मुकाबले ज्यादा तेजी से महंगा बनाया है।
आम निवेशक के लिए सोने और चांदी की कीमतों में इस तेजी का क्या मतलब है?
आम निवेशक के लिए इसका मतलब है कि कीमती धातुओं ने पारंपरिक बचत योजनाओं (जैसे FD) की तुलना में कहीं ज्यादा रिटर्न दिया है। हालांकि, नई खरीदारी करने वालों के लिए अब लागत बहुत बढ़ गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि लंबे समय के लिए निवेश करना अभी भी फायदेमंद हो सकता है, क्योंकि वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए कीमतों में गिरावट के आसार फिलहाल कम हैं।
अन्य पढ़े: