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Gold: सोने और चांदी की कीमतों में ऐतिहासिक उछाल

Dhanarekha
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Gold: सोने और चांदी की कीमतों में ऐतिहासिक उछाल

कीमतों में रिकॉर्ड बढ़त और वर्तमान स्थिति

नई दिल्ली: भारतीय सर्राफा बाजार में आज यानी 12 जनवरी 2026 को सोने(Gold) और चांदी की कीमतों ने पिछले सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। सोना ₹1.40 लाख प्रति 10 ग्राम के पार निकल गया है, जबकि चांदी ₹2.57 लाख प्रति किलोग्राम के ऐतिहासिक स्तर(Historical Level) पर पहुंच गई है। गौरतलब है कि सिर्फ एक दिन में चांदी की कीमत में ₹14,000 से ज्यादा की भारी वृद्धि देखी गई है, जो बाजार में निवेशकों की बढ़ती दिलचस्पी और वैश्विक अस्थिरता को दर्शाती है

तेजी के पीछे के मुख्य वैश्विक कारक

कीमतों में इस अभूतपूर्व उछाल(Unprecedented Surge) के पीछे कई अंतरराष्ट्रीय कारण हैं। डॉलर की कमजोरी और अमेरिका में ब्याज दरों में कटौती की संभावना ने सोने(Gold) को आकर्षक बनाया है। इसके साथ ही, रूस-यूक्रेन युद्ध जैसे जियोपॉलिटिकल तनाव और विभिन्न देशों के केंद्रीय बैंकों (जैसे चीन) द्वारा भारी मात्रा में गोल्ड रिजर्व जमा करने से डिमांड बढ़ी है। चांदी के मामले में, सोलर पैनल और ईवी (EV) जैसे इंडस्ट्रियल सेक्टर में बढ़ती मांग ने इसकी कीमतों को नई ऊंचाइयों पर पहुंचा दिया है।

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भविष्य का अनुमान और शुद्धता की पहचान

विशेषज्ञों के अनुसार, यह तेजी यहीं रुकने वाली नहीं है। अनुमान है कि इस साल के अंत तक सोना(Gold) ₹1.50 लाख और चांदी ₹2.75 लाख के स्तर को छू सकती है। ऐसे में खरीदारों के लिए सावधानी बरतना जरूरी है। असली चांदी की पहचान के लिए मैग्नेट टेस्ट (चुंबक से न चिपकना) और आइस टेस्ट (बर्फ का तेजी से पिघलना) जैसे सरल तरीके अपनाए जा सकते हैं। बढ़ते दामों के बीच निवेश करने से पहले बाजार के रुझानों को समझना बेहद आवश्यक है।

अलग-अलग शहरों में सोने के रेट अलग-अलग क्यों होते हैं?

IBJA (इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन) द्वारा जारी किए गए रेट बेस प्राइस होते हैं। शहरों के रेट इसलिए अलग होते हैं क्योंकि उनमें 3% GST, मेकिंग चार्ज और ज्वेलर्स का अपना प्रॉफिट मार्जिन शामिल नहीं होता है। इसके अलावा, स्थानीय करों और परिवहन लागत के कारण भी कीमतों में अंतर आ जाता है।

चांदी की कीमतों में सोने के मुकाबले ज्यादा प्रतिशत वृद्धि क्यों हो रही है?

चांदी की कीमतों में अधिक उछाल का मुख्य कारण इसकी इंडस्ट्रियल डिमांड है। आजकल सोलर एनर्जी, इलेक्ट्रॉनिक्स और इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) के निर्माण में चांदी का भारी उपयोग हो रहा है। औद्योगिक कच्चे माल के रूप में इसकी बढ़ती जरूरत और वैश्विक सप्लाई में कमी के कारण 2025 में चांदी 167% महंगी हुई, जबकि सोना(Gold) 75% बढ़ा।

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