हैदराबाद । फोरम फॉर गुड गवर्नेंस (FGG) ने तेलंगाना सरकार से ‘गृह ज्योति’ मुफ्त बिजली (Free electricity) योजना को आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए सीमित करने का आग्रह किया है, राज्य पर वित्तीय (Financial)बोझ को लेकर चिंता जताई है।
40 लाख घरों को लाभ मिलने की संभावना
एफजीजी अध्यक्ष एम. पद्मनाभा रेड्डी ने मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी को भेजे गए पत्र में कहा कि ‘गृह ज्योति’ योजना से लगभग 40 लाख घरों को लाभ मिलने की संभावना है, लेकिन इसका वार्षिक खर्च करीब 5,500 करोड़ तक पहुँच सकता है। उन्होंने चेतावनी दी कि सभी के लिए मुफ्त बिजली देना ‘खराब अर्थशास्त्र’ है और इससे डिस्कॉम (विद्युत वितरण कंपनियों) की वित्तीय स्थिति और बिगड़ सकती है, साथ ही शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों से धन हट सकता है।
लाभार्थी के आर्थिक स्थिति से कोई फर्क नहीं
‘गृह ज्योति’ योजना के तहत घरेलू उपयोग के लिए महीने में 200 यूनिट तक मुफ्त बिजली दी जाती है, और इसके लिए लाभार्थी के आर्थिक स्थिति से कोई फर्क नहीं रखा जाता है। पद्मनाभा रेड्डी ने मुख्यमंत्री से इस नीति की पुन: समीक्षा करने और स्पष्ट योग्यता मानदंड तय करने का अनुरोध किया है, ताकि केवल गरीब और वास्तव में जरूरतमंद ही इसका लाभ उठा सकें। एफजीजी ने यह भी कहा कि जब तेलंगाना राज्य जून 2014 में स्थापित हुआ था, तब यह अपनी शक्ति आवश्यकता का केवल करीब 50% ही उत्पादन कर पा रहा था। बिजली उपलब्धता सुधारने के लिए सरकार ने भद्राद्री, यदाद्री और कोत्तागुड़ेम जैसे नए तापीय विद्युत परियोजनाओं की योजना बनाई थी, लेकिन कई कारणों से ये समय पर पूर्ण नहीं हो पाईं।
तेलंगाना बिजली में आत्मनिर्भर है
इसके परिणामस्वरूप, राज्य को अन्य राज्यों और निजी एजेंसियों से बिजली खरीदनी पड़ी, जिससे यह धारणा बनी कि तेलंगाना बिजली में आत्मनिर्भर है। कृषि पंप सेटों को मुफ्त बिजली देने से फसलों के पैटर्न में बदलाव आया और डिस्कॉम्स की आर्थिक स्थिति में भारी गिरावट आ गई, जिससे वे भारी कर्ज़ में धकेल दिए गए हैं।
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