हैदराबाद। फलकनुमा डिवीजन (Falaknuma Division) में कानून-व्यवस्था बनाए रखने और असामाजिक गतिविधियों को रोकने के प्रयास में कमाटिपुरा पुलिस स्टेशन ने एक राउटीशीटर के खिलाफ मुकदमा सफलतापूर्वक चलाकर उसे सजा दिलाई। मामले में आरोपी मोहम्मद रियाजुद्दीन पहले से ही बाउंड-ओवर शर्तों में बंधा हुआ था। उसने शपथ पत्र पर हस्ताक्षर कर किसी भी आपराधिक गतिविधि से बचने का वचन दिया था। हालांकि, हाल ही में आरोपी नए आपराधिक मामले में संलिप्त पाया गया, जो उसके बाउंड-ओवर (Bound-over) शर्तों का उल्लंघन है।
विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट ने के. ज्योति के समक्ष किया पेश
इसके बाद कमाटिपुरा पुलिस ने आरोपी को विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट ने के. ज्योति के समक्ष पेश किया और सुरक्षा शर्तों के उल्लंघन पर कानूनी कार्रवाई की मांग की। विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट ने सबूतों और पुलिस द्वारा प्रस्तुत रिकॉर्ड की समीक्षा के बाद रियाज को दोषी पाया और उसे एक महीने 30 साधारण कारावास की सजा सुनाई। न्यायिक औपचारिकताओं के बाद आरोपी को पुलिस ने हिरासत में लिया और सेंट्रल जेल, चांचलगुड़ा में भेजा गया। हैदराबाद सिटी पुलिस ने कहा कि कोई भी इतिहास-शीटर या असामाजिक तत्व जो जनता की शांति भंग करता है या कानूनी बंधनों का उल्लंघन करता है, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।
राउडी शीट क्या होती है?
पुलिस विभाग में ऐसे व्यक्तियों का रिकॉर्ड रखने के लिए एक विशेष रजिस्टर बनाया जाता है, जिसे राउडी शीट कहा जाता है। इसमें उन लोगों के नाम दर्ज किए जाते हैं जिन पर बार-बार झगड़ा, मारपीट, धमकी या अन्य आपराधिक गतिविधियों में शामिल होने का संदेह होता है। इसका उद्देश्य पुलिस को संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखने में मदद करना और क्षेत्र में कानून-व्यवस्था बनाए रखना होता है।
राउडी शीट से क्या तात्पर्य है?
कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस द्वारा तैयार किया गया वह रिकॉर्ड, जिसमें आदतन अपराध करने वाले या उपद्रव करने वाले लोगों की जानकारी रखी जाती है, राउडी शीट कहलाता है। इसमें व्यक्ति का नाम, पता, पिछले मामलों का विवरण और उसकी गतिविधियों की निगरानी से जुड़ी जानकारी दर्ज की जाती है। इस सूची में शामिल लोगों पर पुलिस समय-समय पर नजर रखती है।
पुलिस जांच कैसे होती है?
किसी अपराध की सूचना मिलने के बाद पुलिस सबसे पहले शिकायत या एफआईआर दर्ज करती है। इसके बाद घटनास्थल का निरीक्षण, सबूत इकट्ठा करना, गवाहों से पूछताछ करना और संदिग्ध व्यक्तियों से पूछताछ की जाती है। जरूरत पड़ने पर फॉरेंसिक जांच भी कराई जाती है। सभी तथ्यों और सबूतों के आधार पर पुलिस रिपोर्ट तैयार करती है और मामले को अदालत में प्रस्तुत करती है, जहाँ आगे कानूनी कार्रवाई होती है।
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