सुएला ब्रेवरमैन ने छोड़ी टोरी पार्टी, नाइजल फराज से मिलाया हाथ
लंदन: गोवा मूल की और ब्रिटेन(British) की पूर्व गृह मंत्री सुएला ब्रेवरमैन ने कंजर्वेटिव (टोरी) पार्टी से इस्तीफा देकर ‘रिफॉर्म यूके’ (Reform UK) जॉइन कर ली है। 45 वर्षीय ब्रेवरमैन ने अपनी पुरानी पार्टी पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि कंजर्वेटिव सरकार के दौरान ब्रिटेन में इमिग्रेशन (आप्रवासन) पूरी तरह से नियंत्रण से बाहर हो गया है। उन्होंने लंदन में एक कार्यक्रम के दौरान कट्टर दक्षिणपंथी नेता नाइजल फराज की मौजूदगी में पार्टी की सदस्यता ली। ब्रेवरमैन अब उन 8 सांसदों की सूची में शामिल हो गई हैं जिन्होंने हाल के दिनों में टोरी पार्टी छोड़ फराज का दामन थामा है।
“ब्रिटेन टूट चुका है”: ब्रेवरमैन का तीखा हमला
पार्टी बदलते ही ब्रेवरमैन ने ब्रिटिश व्यवस्था(British System) पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि देश वर्तमान में “तकलीफ” में है, सार्वजनिक सेवाएं चरमरा गई हैं और युवा सुरक्षित भविष्य के लिए देश छोड़ने को मजबूर हैं। उन्होंने नाइजल फराज(British) की प्रशंसा करते हुए उन्हें ब्रिटेन का सबसे साहसी नेता बताया। ब्रेवरमैन हमेशा से ही आप्रवासन के खिलाफ सख्त कानून बनाने की पक्षधर रही हैं और रिफॉर्म यूके की विचारधारा उनकी कट्टर दक्षिणपंथी सोच के बिल्कुल अनुकूल मानी जा रही है।
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विवादों से भरा रहा है राजनीतिक सफर
सुएला ब्रेवरमैन ब्रिटिश(British) राजनीति का एक ऐसा चेहरा रही हैं जो हमेशा चर्चाओं और विवादों में रहीं। उन्हें दो बार गृह मंत्री के पद से हटाया गया था—पहली बार लिज ट्रस के कार्यकाल में कोड ऑफ कंडक्ट के उल्लंघन के कारण और दूसरी बार ऋषि सुनक के कार्यकाल में पुलिस और प्रदर्शनकारियों पर उनकी विवादित टिप्पणियों की वजह से। ऋषि सुनक, बोरिस जॉनसन और लिज ट्रस तीनों की सरकारों में शीर्ष पदों पर रहने के बावजूद, विचारधारा के मतभेदों ने अंततः उन्हें अपनी मूल पार्टी से अलग कर दिया।
सुएला ब्रेवरमैन ने कंजर्वेटिव पार्टी छोड़ने का मुख्य कारण क्या बताया?
ब्रेवरमैन ने मुख्य रूप से ‘आप्रवासन’ के मुद्दे पर नाराजगी जताई। उनका आरोप है कि कंजर्वेटिव पार्टी इमिग्रेशन को नियंत्रित करने में विफल(British) रही है, जिसके कारण देश की सार्वजनिक सेवाएं और सुरक्षा खतरे में पड़ गई हैं।
रिफॉर्म यूके पार्टी में जाने से ब्रिटिश राजनीति पर क्या असर पड़ेगा?
ब्रेवरमैन के जाने से कंजर्वेटिव पार्टी का दक्षिणपंथी वोट बैंक खिसक सकता है। रिफॉर्म यूके अब संसद में एक मजबूत ताकत के रूप में उभर रही है, जो भविष्य के चुनावों में मुख्यधारा की पार्टियों के लिए कड़ी चुनौती पेश करेगी।
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