बाजार में रिकवरी और वर्तमान कीमतें
नई दिल्ली: लगातार तीन दिनों की बड़ी गिरावट के बाद आज चांदी की कीमतों में 17 हजार रुपए (7%) का जोरदार(Gold) उछाल आया है, जिससे MCX पर चांदी 2.53 लाख रुपए प्रति किलो के स्तर पर पहुंच गई है। इसी तरह, सोने में भी 5 हजार रुपए (3%) की तेजी देखी गई है और यह 1.45 लाख रुपए प्रति 10 ग्राम के स्तर पर कारोबार कर रहा है। पिछले कुछ दिनों में मुनाफावसूली (Profit Booking) के चलते चांदी 4 लाख रुपए के उच्च स्तर से गिरकर 2.4 लाख रुपए तक आ गई थी, लेकिन अब बाजार फिर से संभलता नजर आ रहा है।
मार्जिन मनी और कीमतों पर दबाव का कारण
विशेषज्ञों के अनुसार, शिकागो मर्केंटाइल एक्सचेंज (CME) द्वारा सोने(Gold) और चांदी पर मार्जिन मनी बढ़ाना कीमतों में अस्थिरता का एक मुख्य कारण है। चांदी पर मार्जिन 11% से बढ़ाकर 15% और सोने पर 6% से बढ़ाकर 8% कर दिया गया है। मार्जिन बढ़ने का मतलब है कि ट्रेडर्स को सौदा बनाए रखने के लिए अब ज्यादा कैश देना होगा। जिनके पास अतिरिक्त फंड नहीं होता, उन्हें मजबूरी में अपनी पोजीशन बेचनी पड़ती है, जिससे बाजार में अचानक गिरावट देखने को मिलती है।
खरीददारों के लिए सावधानी और शुद्धता की पहचान
बाजार में इस भारी उतार-चढ़ाव के बीच आम निवेशकों और ज्वेलरी खरीदने वालों को BIS हॉलमार्क देखकर ही सोना(Gold) खरीदने की सलाह दी गई है। असली चांदी की पहचान के लिए चुंबक और बर्फ जैसे आसान घरेलू तरीके अपनाए जा सकते हैं। सर्राफा बाजार और वायदा बाजार की कीमतों में अंतर का मुख्य कारण फिजिकल गोल्ड को लाने-ले जाने का खर्च और स्टोरेज कॉस्ट है, इसलिए खरीदारी से पहले हमेशा IBJA जैसी विश्वसनीय संस्थाओं से रेट क्रॉस-चेक करना जरूरी है।
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चांदी की कीमतों में अचानक ₹17,000 की इतनी बड़ी बढ़त क्यों आई?
चांदी की कीमतों में इस उछाल के पीछे मुख्य रूप से ‘शॉर्ट कवरिंग’ और ‘लोअर लेवल बाइंग’ (निचले स्तर पर खरीदारी) जिम्मेदार है। पिछले तीन दिनों में चांदी ₹4 लाख से गिरकर ₹2.4 लाख तक आ गई थी, जो कि एक बहुत बड़ी गिरावट थी। जब कीमतें इतनी(Gold) ज्यादा गिर जाती हैं, तो निवेशक इसे खरीदारी का एक अच्छा अवसर मानते हैं। इसके अलावा, औद्योगिक मांग और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में आई स्थिरता ने भी कीमतों को सहारा दिया, जिससे घरेलू बाजार (MCX) में 7% की तेजी देखी गई।
मार्जिन मनी बढ़ने से आम निवेशक या छोटे ट्रेडर्स पर क्या असर पड़ता है?
मार्जिन मनी बढ़ने का सीधा असर ट्रेडर्स की जेब और उनकी ट्रेडिंग क्षमता पर पड़ता है। इसे ऐसे समझें:
अतिरिक्त फंड की जरूरत: अगर पहले आपको ₹1 लाख का सौदा करने के लिए ₹11,000 जमा करने होते थे, तो 15% मार्जिन होने पर अब आपको ₹15,000 जमा करने होंगे।
मजबूरी में बिकवाली: जिन छोटे ट्रेडर्स के पास अतिरिक्त पैसा नहीं होता, एक्सचेंज उनका सौदा अपने आप काट देता है या उन्हें बेचने पर मजबूर करता है।
बाजार में गिरावट: जब बहुत सारे लोग एक साथ मार्जिन की कमी के कारण अपना सोना या चांदी बेचते हैं, तो बाजार में सप्लाई बढ़ जाती है और कीमतें नीचे की ओर दबाव महसूस करती हैं।
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