बिजनेस लोन लेने वाली महिलाओं की संख्या 5 साल में दोगुनी
नई दिल्ली: भारतीय महिलाएं अब घर की चारदीवारी(New Wave) से बाहर निकलकर उद्यमिता (Entrepreneurship) की ओर कदम बढ़ा रही हैं। पिछले 5 वर्षों में बिजनेस लोन लेने वाली महिलाओं की संख्या में अभूतपूर्व उछाल आया है। सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSME) के लिए कर्ज लेने वाली महिलाओं की संख्या 2.62 गुना बढ़ी है। वित्तीय आंकड़ों के अनुसार, बिजनेस लोन बाजार में महिलाओं की हिस्सेदारी साल 2019 के 9% से बढ़कर दिसंबर 2024 तक 16% हो गई है। यह बदलाव दर्शाता है कि महिलाएं अब छोटे और मझोले स्तर के व्यवसायों का नेतृत्व करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।
सरकारी योजनाओं में महिलाओं का दबदबा
वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी द्वारा संसद में दी गई जानकारी के अनुसार, केंद्र सरकार की विभिन्न वित्तीय योजनाओं में महिलाओं की भागीदारी प्रभावशाली(New Wave) रही है। स्टैंड-अप इंडिया योजना में महिलाओं की हिस्सेदारी 82% के साथ शीर्ष पर है, जबकि मुद्रा योजना में 67% खातों का संचालन महिलाएं कर रही हैं। उत्तर और पूर्वी भारत के राज्यों, विशेषकर बिहार (4.98 करोड़ खाते) और उत्तर प्रदेश, में इन ऋणों की मांग सबसे अधिक देखी गई है। श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के सर्वे के मुताबिक, इन योजनाओं ने 2015 से 2018 के बीच 1.12 करोड़ नए रोजगार पैदा करने में मदद की है।
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क्रेडिट स्कोर और वित्तीय स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता
महिलाएं अब अपने वित्तीय प्रोफाइल को लेकर पहले से कहीं अधिक सजग हो गई हैं। वर्तमान में करीब 2.7 करोड़ महिलाएं नियमित(New Wave) रूप से अपना क्रेडिट स्कोर ट्रैक कर रही हैं, जो कि पिछले वर्ष की तुलना में 42% अधिक है। महिलाएं अब लोन लेने से पहले अपनी क्रेडिट हिस्ट्री सुधारने पर ध्यान देती हैं ताकि उन्हें आसान शर्तों और कम ब्याज दरों पर कर्ज मिल सके। महाराष्ट्र, तमिलनाडु और कर्नाटक जैसे राज्य इस ‘क्रेडिट सशक्तीकरण’ की दौड़ में सबसे आगे हैं।
स्टैंड-अप इंडिया और मुद्रा योजना में महिलाओं की अधिक भागीदारी का क्या अर्थ है?
इसका अर्थ यह है कि जमीनी स्तर पर महिलाएं स्वरोजगार को अपना रही हैं। स्टैंड-अप इंडिया (82%) और मुद्रा योजना (67%) की सफलता(New Wave) दिखाती है कि सरकार की आर्थिक नीतियां महिलाओं को आर्थिक रूप से स्वतंत्र बनाने में सफल रही हैं। यह न केवल महिलाओं की आय बढ़ा रहा है, बल्कि समाज में उनकी निर्णय लेने की क्षमता को भी मजबूत कर रहा है।
महिलाएं अपना क्रेडिट स्कोर ट्रैक करने पर इतना ध्यान क्यों दे रही हैं?
क्रेडिट स्कोर वित्तीय साख का पैमाना है। महिलाएं अब जानती हैं कि एक अच्छा क्रेडिट स्कोर उन्हें भविष्य में बड़े बिजनेस लोन लेने में मदद करेगा। 2.7 करोड़ महिलाओं का क्रेडिट स्कोर ट्रैक करना यह दर्शाता है कि वे अब पारंपरिक बचत के तरीकों से आगे बढ़कर आधुनिक बैंकिंग और डिजिटल फाइनेंस को समझ रही हैं।
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