Donald Trump : के बयान ने एक बार फिर वैश्विक राजनीति में हलचल मचा दी है। ट्रंप ने दावा किया कि भारत रूस से तेल खरीदना बंद कर अमेरिका से खरीदने को तैयार हो गया है। इस पर रूस (क्रेमलिन) ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि भारत का तेल आयात पूरी तरह उसका स्वतंत्र निर्णय है।
क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने कहा कि भारत द्वारा अलग-अलग देशों से तेल खरीदना कोई नई बात नहीं है और इसे रूस के खिलाफ कदम नहीं माना जाना चाहिए। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि नई दिल्ली की ओर से तेल खरीद बंद करने को लेकर कोई आधिकारिक सूचना नहीं मिली है।
ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि भारत रोज़ाना रूस से लगभग 15 से 20 लाख बैरल कच्चा तेल आयात करता है। इतनी बड़ी मात्रा की आपूर्ति को अमेरिका द्वारा तुरंत पूरा करना व्यावहारिक रूप से संभव नहीं है। अमेरिकी हल्का कच्चा तेल, रूस के यूराल्स ग्रेड का विकल्प नहीं माना जा सकता और भारतीय रिफाइनरियों की ज़रूरतों से पूरी तरह मेल नहीं खाता।
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यूक्रेन युद्ध से पहले रूस का भारत के तेल आयात में हिस्सा (Donald Trump) बेहद कम था, लेकिन रियायती दरों के कारण अब भारत उसका बड़ा खरीदार बन गया है। यदि रूसी आपूर्ति पूरी तरह रुकती है तो वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती हैं, जिसका असर अमेरिका में पेट्रोल की कीमतों पर भी पड़ेगा, ऐसा रूस का कहना है।
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