एक ही परिवार के 5 लोगों की मौत
एक खुशियों से भरी रात कुछ ही घंटों में मातम में बदल गई। परिवार के सदस्य दूसरी बहन के मायरा भरने के लिए रात में घर से निकले थे, लेकिन रास्ते में हुए भीषण हादसे ने सब कुछ छीन लिया।
शादी की खुशियां बदलीं मातम में
घर से निकले थे उत्सव के लिए- परिवार में शादी का माहौल था। (maayara) मायरा भरने की रस्म के लिए सभी बेहद उत्साहित थे। रात के समय वे समारोह में शामिल होने के लिए रवाना हुए, लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था।
पाली में बहन का मायरा भरकर हम दो गाड़ियों में बैठकर परिवार के साथ (Ahmedabad) अहमदाबाद दूसरी बहन के यहां मायरा भरने जा रहे थे। अगले दिन समय से पहुंचने के लिए रात को ही निकले थे। सुबह करीब साढ़े तीन बजे सिरोही के एक होटल पर साथ चाय-नाश्ता भी किया। फिर निकले, मेरी गाड़ी छोटे भाई की वैन से करीब 25 किलोमीटर आगे थी।
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अचानक पुलिस का फोन आया तो हॉस्पिटल पहुंचे। वहां भाई रामलाल, मां और भतीजे-भतीजी की लाशें देखते ही मेरे होश उड़ गए। तीन घंटे में हमारी दुनिया उजड़ गई।

यह कहना है पाली के भावनगर निवासी डायाराम कुमावत का। शनिवार सुबह सड़क हादसे में डायाराम के छोटे भाई रामलाल कुमावत सहित परिवार के 5 लोगों की मौत हो गई थी।
20 फरवरी को भांजे विकास (पुत्र भंवरलाल कुमावत) की शादी थी, वहां मायरा भरा, इसके बाद 21 फरवरी को अहमदाबद में बहन सुगना के बेटे की शादी में मायरा भरना था। 20 फरवरी की रात करीब 2 बजे दोनों भाई परिवार के साथ अलग-अलग कार से अहमदाबाद के लिए निकले थे।
यरा भरना क्या होता है?
पुरानी मान्यताओं के हिसाब से भाई अपनी बहन को उसके बच्चों की शादी में मायरे के जरिए आर्थिक मदद करता था
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