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Bhoomi Pujan : विकास प्रयासों के बावजूद कई प्रकार का अपमानों – वाकिटी श्रीहरी

Ajay Kumar Shukla
Ajay Kumar Shukla
Bhoomi Pujan : विकास प्रयासों के बावजूद कई प्रकार का अपमानों – वाकिटी श्रीहरी

मंत्री ने विद्युत सब स्टेशन के लिए भूमि पूजन किया

हैदराबाद। राज्य पशु संवर्धन, पैडी उद्योग विकास, मत्स्य, युवा सेवा एवं खेल मंत्री वाकिटी श्रीहरी ने मक्तल विधानसभा क्षेत्र के मागनूर मंडल वाडवाट गांव और उट्कुर मंडल पुली मामिडी गांव में 33/11 केवी विद्युत सब स्टेशन के निर्माण के लिए भूमि पूजन (Bhoomi Pujan) किया। इस अवसर पर मंत्री श्रीहरी ने कहा कि उन्होंने राजनीतिक जीवन में क्षेत्र के विकास के लिए लगातार काम किया है। उन्होंने कहा कि एससी, एसटी, बीसी और अल्पसंख्यक वर्गों के हितों के लिए काम करना उनका प्रमुख उद्देश्य है। मक्तल विधानसभा क्षेत्र के विकास के लिए उन्होंने हमेशा प्रयास किया है, और मुनिसिपल चुनाव के दौरान उनके ऊपर लगाए गए विभिन्न आरोप और झूठे प्रचारों का जनता ने स्पष्ट जवाब दिया है।

14 विधायकों के कार्यकाल में केवल 296 करोड़ रुपये मक्तल क्षेत्र में आए

मंत्री ने कहा कि पिछले 72 वर्षों में 14 विधायकों के कार्यकाल में केवल 296 करोड़ रुपये मक्तल क्षेत्र में आए, जबकि उनके दो वर्षों के कार्यकाल में 1035 करोड़ रुपये क्षेत्र के विकास के लिए लाए गए। उन्होंने कहा कि विकास कार्यों के लिए काम करने वालों का अपमान नहीं होना चाहिए और क्षेत्र में निश्चित रूप से बदलाव लाना आवश्यक है। श्रीहरी ने शिक्षा और सिंचाई सहित विभिन्न क्षेत्रों में विकास कार्यों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता जताई। उन्होंने कहा कि युवाओं का भविष्य सुरक्षित करना उनकी जिम्मेदारी है और इस सब स्टेशन का निर्माण समय पर पूरा होना चाहिए। उन्होंने अवरोधक तत्वों को पार करते हुए विकास की दिशा में लगातार काम करने की प्रेरणा दी।

मंत्री ने यह भी कहा कि उनके विकास प्रयासों के बावजूद कई प्रकार के अपमानों का सामना करना पड़ा, लेकिन उन्होंने कभी डर या भय महसूस नहीं किया और क्षेत्र के विकास के लिए निरंतर कार्यरत रहेंगे। उन्होंने ग्रामीण युवाओं से आह्वान किया कि वे अपने भविष्य के लिए मेहनत करें और क्षेत्र के आर्थिक एवं सामाजिक विकास में योगदान दें।

पशु संवर्धन योजना क्या है?

पशु संवर्धन योजना ऐसी सरकारी योजना होती है जिसका उद्देश्य पशुओं की नस्ल सुधार, दुग्ध उत्पादन बढ़ाने, टीकाकरण, चारा विकास और पशु स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करना है। केंद्र स्तर पर Department of Animal Husbandry and Dairying तथा विभिन्न राज्य सरकारें इस प्रकार की योजनाएँ चलाती हैं। इन योजनाओं के तहत किसानों को अनुदान, प्रशिक्षण और पशु चिकित्सा सहायता दी जाती है, ताकि उनकी आय और पशुधन की उत्पादकता बढ़ सके।

पशुपालन का दूसरा नाम क्या है?

पशुपालन को सामान्यतः “पशुधन पालन” या “एनिमल हसबेंड्री” (Animal Husbandry) भी कहा जाता है। यह कृषि से जुड़ा व्यवसाय है, जिसमें गाय, भैंस, बकरी, भेड़, मुर्गी आदि जानवरों का पालन-पोषण किया जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य दूध, मांस, अंडे, ऊन और अन्य उत्पाद प्राप्त करना होता है। ग्रामीण अर्थव्यवस्था में पशुपालन आय का महत्वपूर्ण स्रोत माना जाता है।

पशुधन क्या है उदाहरण सहित समझाइए?

पशुधन से आशय उन सभी पालतू जानवरों से है जो कृषि और मानव जीवन के लिए उपयोगी होते हैं। उदाहरण के तौर पर गाय और भैंस दूध देती हैं, बकरी और भेड़ मांस व ऊन प्रदान करती हैं, जबकि बैल खेती में काम आते हैं। मुर्गीपालन से अंडे और मांस प्राप्त होता है। इस प्रकार पशुधन ग्रामीण अर्थव्यवस्था और खाद्य सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

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