తెలుగు | Epaper

China: ईरान की दुर्गति और चीन की ‘रणनीतिक दूरी’: संकट में अकेला पड़ा तेहरान

Dhanarekha
Dhanarekha
China: ईरान की दुर्गति और चीन की ‘रणनीतिक दूरी’: संकट में अकेला पड़ा तेहरान

व्यापार में भारी गिरावट और चीन का पीछे हटना

नई दिल्ली: ईरान-इजराइल युद्ध के बीच यह साफ हो गया है कि ईरान का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार चीन(China) अब उससे दूरी बना रहा है। आंकड़ों के मुताबिक, पिछले साल चीन से ईरान को होने वाला निर्यात केवल 6.93 अरब डॉलर रहा, जो पिछले 11 वर्षों में सबसे कम है। यह 2017 के मुकाबले 63% की भारी गिरावट दर्शाता है। हालांकि चीन आज भी ईरान के कुल तेल निर्यात का 90% हिस्सा खरीदता है, लेकिन चीन के कुल वैश्विक व्यापार(Global Trade) में ईरान की हिस्सेदारी 1% से भी कम रह गई है। यह स्पष्ट करता है कि चीन ईरान पर अपनी निर्भरता को लगातार कम कर रहा है

400 अरब डॉलर का वादा और धरातल की हकीकत

साल 2021 में चीन और ईरान ने 25 साल के लिए एक ‘रणनीतिक सहयोग समझौते’ पर हस्ताक्षर किए थे, जिसके तहत चीन(China) को ईरान में 400 अरब डॉलर का विशाल निवेश(Huge Investment) करना था। लेकिन हकीकत यह है कि अब तक केवल 2 से 3 अरब डॉलर का काम ही जमीन पर उतर पाया है। पश्चिमी देशों और अमेरिका द्वारा लगाए गए कड़े प्रतिबंधों के कारण चीन ईरान में बड़े निवेश से बच रहा है। चीन का कम एक्सपोजर यह सुनिश्चित करता है कि यदि ईरान की अर्थव्यवस्था युद्ध के कारण ध्वस्त भी होती है, तो चीन को बहुत मामूली आर्थिक झटका लगेगा।

अन्य पढ़े: ईरान-इजराइल महाजंग: उत्तराधिकारी पर इजराइल की ‘किल लिस्ट’ और भीषण हमले

पश्चिमी प्रतिबंध और तेल की मजबूरी

ईरान अपनी अर्थव्यवस्था को चलाने के लिए पूरी तरह से तेल निर्यात पर निर्भर है, जिसका 90% हिस्सा चीन जाता है। लेकिन अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण ईरान अपना तेल खुले बाजार(China) में नहीं बेच पाता, जिसका फायदा उठाकर चीन भारी डिस्काउंट पर ईरानी तेल खरीदता है। विशेषज्ञों का मानना है कि चीन ने पहले ही ईरान की मौजूदा स्थिति का अंदाजा लगा लिया था, इसीलिए उसने धीरे-धीरे अपनी निर्यात और निवेश योजनाओं को समेट लिया। वर्तमान युद्ध की स्थिति में, चीन का ईरान के प्रति उदासीन रवैया तेहरान के लिए एक बड़ा कूटनीतिक झटका है।

चीन ने ईरान के साथ 400 अरब डॉलर की डील के बावजूद निवेश क्यों नहीं किया?

इसका मुख्य कारण अमेरिका और पश्चिमी देशों द्वारा ईरान पर लगाए गए अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध हैं। चीन अपनी बड़ी कंपनियों को अमेरिकी प्रतिबंधों के जोखिम में नहीं डालना चाहता, इसलिए उसने वादे के बावजूद जमीन पर बहुत कम निवेश किया है।

ईरान के लिए चीन का साथ क्यों अपरिहार्य है?

ईरान अपने कुल तेल निर्यात का 90% चीन को बेचता है। प्रतिबंधों के कारण कोई और देश ईरान से तेल खरीदने का जोखिम नहीं उठाता। यदि चीन तेल खरीदना बंद कर देता है, तो ईरान की अर्थव्यवस्था पूरी तरह ठप हो जाएगी।

अन्य पढ़े:

📢 For Advertisement Booking: 98481 12870