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CNG: मिडिल-ईस्ट संकट: भारत में CNG-PNG के दाम बढ़ने की आहट

Dhanarekha
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CNG: मिडिल-ईस्ट संकट: भारत में CNG-PNG के दाम बढ़ने की आहट

गैस सप्लाई में 40% की भारी कटौती

नई दिल्ली: मिडिल-ईस्ट में चल रहे युद्ध और ईरान द्वारा कतर के ‘रास लफान’ और ‘मेसाईद’ प्लांट पर किए गए ड्रोन हमले के बाद भारत की गैस सप्लाई पर गहरा संकट मंडरा रहा है। भारत(India) अपनी जरूरत का 40% LNG कतर से आयात करता है, लेकिन इस हमले के बाद वहां उत्पादन पूरी तरह रुक गया है। इस आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान के कारण भारत में गैस की सप्लाई में 40% की कमी आई है, जिससे आने वाले समय में CNG और PNG की कीमतों में उछाल आने की प्रबल आशंका है

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर संकट और बढ़ती चुनौतियां

भारत के लिए सबसे बड़ी समस्या ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ का सुरक्षित न रहना है। यह एक संकरा समुद्री मार्ग है, जिससे भारत अपना 50% कच्चा तेल और 54% LNG मंगवाता है। युद्ध के कारण इस रास्ते से गुजरने वाले जहाजों की संख्या 91 से घटकर सिर्फ 26 रह गई है। गैस कंपनियों के सामने संकट यह है कि यदि वे अनुबंध (Contract) वाली सस्ती गैस नहीं पा सकीं, तो उन्हें ‘स्पॉट मार्केट’ से बहुत महंगी गैस खरीदनी पड़ेगी, जिसका सीधा बोझ आम ग्राहकों की जेब पर पड़ेगा।

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बिजली और खाद उत्पादन पर भी मंडराया खतरा

गैस केवल गाड़ियों और घरों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह देश के औद्योगिक और बुनियादी ढांचे का आधार है। आयातित LNG का बड़ा हिस्सा बिजली बनाने वाले पावर प्लांट्स और यूरिया (खाद) बनाने वाली फैक्ट्रियों में इस्तेमाल होता है। सप्लाई कम होने से बिजली उत्पादन महंगा हो सकता है और खाद की किल्लत भी बढ़ सकती है। पेट्रोनेट LNG ने पहले ही ‘फोर्स मेजर’ नोटिस जारी कर दिया है, जिससे यह स्पष्ट है कि स्थिति सामान्य होने तक ऊर्जा क्षेत्र में अस्थिरता बनी रहेगी।

CNG और PNG के दाम बढ़ने की संभावना क्यों जताई जा रही है?

कतर से गैस सप्लाई रुकने के कारण कंपनियों को ‘स्पॉट मार्केट’ से गैस खरीदनी पड़ सकती है। स्पॉट मार्केट में गैस की कीमत मौजूदा कॉन्ट्रैक्ट रेट से दोगुनी से भी ज्यादा है, जिसके कारण अंततः रिटेल कीमतों में बढ़ोत्तरी होने की संभावना है।

गैस सप्लाई घटने का असर केवल वाहनों पर ही नहीं, बल्कि और किन क्षेत्रों पर पड़ेगा?

गैस की किल्लत का सीधा असर बिजली उत्पादन (गैस आधारित पावर प्लांट्स) और फर्टिलाइजर सेक्टर (यूरिया उत्पादन) पर पड़ेगा। इससे बिजली महंगी हो सकती है और खाद की उपलब्धता भी कम हो सकती है।

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