Rahul gandhi : संसद सत्र के दौरान कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी द्वारा पहनी गई एक खास माला इन दिनों चर्चा में है। धातु से सजाई गई यह माला नागालैंड की जनजातीय संस्कृति से जुड़ी हुई है।
पूर्वोत्तर भारत के नागा समुदाय में इस तरह के हार का विशेष महत्व होता है। यह सिर्फ सजावट के लिए नहीं बल्कि सम्मान, पहचान और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक माना जाता है।
नागालैंड की जनजातीय परंपराओं में आभूषणों का गहरा अर्थ होता है। नेकलेस और पारंपरिक हेडगियर से यह पता चलता है कि व्यक्ति किस जनजाति से है और समाज में उसकी स्थिति क्या है।
बताया जा रहा है कि राहुल गांधी ने जो माला पहनी है वह नागालैंड के मोन जिले में रहने वाली कोन्याक नागा जनजाति की पारंपरिक माला है। इतिहास में इस जनजाति को हेडहंटर योद्धाओं के रूप में भी जाना जाता था।
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नागा पारंपरिक आभूषणों में सिर्फ मोतियों का ही उपयोग (Rahul gandhi) नहीं होता बल्कि धातु के टुकड़े, कांच या पत्थर के मोती, सीप, हड्डियां और लकड़ी जैसे प्राकृतिक पदार्थ भी इस्तेमाल किए जाते हैं।
आज भी यह आभूषण मुख्य रूप से त्योहारों, सांस्कृतिक कार्यक्रमों और सामुदायिक समारोहों में पारंपरिक पोशाक के साथ पहने जाते हैं।
विश्लेषकों का मानना है कि राहुल गांधी द्वारा इस माला को पहनना पूर्वोत्तर राज्यों की संस्कृति के प्रति सम्मान का प्रतीक है।
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