नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष ने आधुनिक युद्ध की रणनीतियों को लेकर दुनिया की बड़ी शक्तियों को नया सबक दिया है। अमेरिका और इजराइल (Americi and Israel) जैसे सैन्य महाशक्तियों के सामने ईरान ने जिस तरह अपनी रणनीति और तैयारियों का प्रदर्शन किया है, उसने वैश्विक रणनीतिकारों को हैरान कर दिया है। माना जा रहा था कि अमेरिकी-इजराइली हमलों के बाद ईरान जल्दी ही दबाव में आ जाएगा, लेकिन ईरान ने अपनी अलग युद्ध रणनीति से इस धारणा को गलत साबित कर दिया। इस संघर्ष से दुनिया की कई बड़ी ताकतों के साथ-साथ भारत को भी आधुनिक युद्ध के बदलते स्वरूप को समझने का मौका मिला है।
महंगे हथियार बनाम सस्ती रणनीति
विशेषज्ञों का कहना है कि मौजूदा दौर के युद्ध केवल अत्याधुनिक और महंगे हथियारों के दम पर नहीं जीते जा सकते। अमेरिका और इजराइल के पास पांचवीं पीढ़ी के आधुनिक फाइटर जेट (Fighter Jet) अत्याधुनिक मिसाइल और डिफेंस सिस्टम मौजूद हैं, लेकिन ईरान ने अपनी रणनीति के जरिए इनकी प्रभावशीलता को चुनौती दी है। इन हथियारों के संचालन और रखरखाव की लागत इतनी अधिक है कि लंबे समय तक युद्ध में इनका इस्तेमाल किसी भी अर्थव्यवस्था पर भारी पड़ सकता है।
ड्रोन और मिसाइलों से दबाव की रणनीति
ईरान ने इस संघर्ष में अपेक्षाकृत सस्ते ड्रोन और मिसाइलों (Missile) का बड़े पैमाने पर उपयोग किया। इसके जवाब में अमेरिका और इजराइल को इन हमलों को रोकने के लिए अत्यधिक महंगे मिसाइल डिफेंस सिस्टम का सहारा लेना पड़ा। इससे सस्ते हथियारों के खिलाफ महंगे रक्षा तंत्र का इस्तेमाल करना उनके लिए काफी महंगा साबित हुआ। साथ ही ईरान ने इजराइल और पश्चिम एशिया में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर ड्रोन हमलों की तीव्रता भी बढ़ा दी, जिससे रक्षा प्रणाली पर दबाव बढ़ गया।
रक्षा मिसाइलों के भंडार पर असर
रिपोर्टों में यह भी दावा किया जा रहा है कि लगातार हमलों के कारण अमेरिका और इजराइल को अपनी रक्षा मिसाइलों के भंडार को लेकर चिंता का सामना करना पड़ सकता है। कई सामरिक विशेषज्ञ ईरान की इस रणनीति को आधुनिक युद्ध की नई दिशा मान रहे हैं।
रूस-यूक्रेन युद्ध से भी मिलता-जुलता परिदृश्य
विश्लेषकों के अनुसार रूस और यूक्रेन के युद्ध में भी ऐसी ही स्थिति देखने को मिली थी, जहां अपेक्षाकृत सस्ते ड्रोन ने भारी सैन्य संसाधनों को चुनौती दी। यूक्रेन ने ड्रोन तकनीक का इस्तेमाल कर रूस को कई मोर्चों पर नुकसान पहुंचाया।
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आधुनिक डिफेंस सिस्टम की सीमाएं
एस-400 जैसे अत्याधुनिक डिफेंस सिस्टम को मुख्य रूप से फाइटर जेट और लंबी दूरी की मिसाइलों को रोकने के लिए तैयार किया गया है। यह लगभग 400 किलोमीटर दूर तक के हवाई खतरों को निशाना बना सकता है। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि हर छोटे हवाई खतरे के खिलाफ इतने महंगे सिस्टम का इस्तेमाल करना व्यावहारिक नहीं होता।
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