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Missile Crisis: मिसाइल संकट: ईरान जंग में 850 टॉमहॉक दागीं

Dhanarekha
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Missile Crisis: मिसाइल संकट: ईरान जंग में 850 टॉमहॉक दागीं

अमेरिका के पास खत्म हो सकता है घातक हथियारों का स्टॉक

वाशिंगटन: ईरान के खिलाफ जारी सैन्य अभियान ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ में अमेरिका ने अपनी सबसे भरोसेमंद ‘टॉमहॉक क्रूज मिसाइल'(Missile Crisis) का बड़े पैमाने पर उपयोग(Use) किया है। रिपोर्ट के मुताबिक, मात्र चार हफ्तों में 850 से ज्यादा मिसाइलें दागी जा चुकी हैं। विशेषज्ञों(Experts) का अनुमान है कि अमेरिकी नौसेना के पास कुल 4,000 टॉमहॉक मिसाइलों का जखीरा था, जिसका लगभग एक-चौथाई हिस्सा इस एक महीने की जंग में खत्म हो चुका है। यह स्थिति अमेरिकी रक्षा मंत्रालय (पेंटागन) के लिए चिंता का विषय बन गई है, क्योंकि इन मिसाइलों की कमी से वैश्विक स्तर पर अमेरिकी सैन्य दबदबा प्रभावित हो सकता है

उत्पादन की धीमी गति और भारी लागत

टॉमहॉक मिसाइल अपनी अचूक मारक क्षमता (1600 किमी से अधिक रेंज) के लिए जानी जाती है, लेकिन इसे बनाना एक जटिल और समय लेने वाली प्रक्रिया है। एक सिंगल टॉमहॉक मिसाइल(Missile Crisis) को तैयार करने में लगभग 2 साल का समय लगता है और इसकी लागत करीब 34 करोड़ रुपये ($3.6 million) बैठती है। वर्तमान में अमेरिका की उत्पादन क्षमता सालाना केवल 600 मिसाइलों की है। ऐसे में जिस रफ्तार से युद्ध में इनका इस्तेमाल हो रहा है, उस कमी को पूरा करने में कई साल लग सकते हैं, जिससे भविष्य के अन्य संभावित खतरों से निपटने में बाधा आ सकती है।

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जापान के साथ अटकी डिफेंस डील

मिसाइलों की कमी को दूर करने के लिए अमेरिका ने जापान के साथ मिलकर इनके उत्पादन की योजना बनाई थी, जिससे सप्लाई दोगुनी हो सकती थी। हालांकि, तकनीक के हस्तांतरण (Technology Transfer) और सुरक्षा शर्तों को लेकर अमेरिका के भीतर ही कड़ा विरोध शुरू हो गया है। अमेरिकी विशेषज्ञों और राजनेताओं को डर है कि संवेदनशील मिसाइल तकनीक विदेश में साझा करना जोखिम भरा हो सकता है। इस राजनीतिक गतिरोध और कड़े नियमों के कारण यह समझौता फिलहाल अधर में लटका हुआ है, जिससे अमेरिका के सामने हथियारों के स्टॉक को फिर से भरने की बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है।

टॉमहॉक मिसाइल को ‘स्टैंड-ऑफ स्ट्राइक’ हथियार क्यों कहा जाता है?

इसे ‘स्टैंड-ऑफ स्ट्राइक’ हथियार इसलिए कहा जाता है क्योंकि यह 1,000 मील (1609 किमी) से अधिक की दूरी से दुश्मन के ठिकाने को सटीक निशाना(Missile Crisis) बना सकती है। इससे अमेरिकी सैनिकों को दुश्मन की सीमा के अंदर या जमीन पर उतरे बिना सुरक्षित दूरी से हमला करने की सुविधा मिलती है।

अमेरिका और जापान के बीच मिसाइल उत्पादन की डील क्यों नहीं सफल हो पा रही है?

इस डील के अटकने का मुख्य कारण तकनीक की गोपनीयता और कड़े नियम हैं। अमेरिका अपनी संवेदनशील मिसाइल तकनीक को साझा करने को लेकर संशय में है, और उसे डर है कि इससे उसकी रक्षा इंडस्ट्री और तकनीक पर नियंत्रण कम हो सकता है।

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