पश्चिम एशिया में जारी युद्ध का असर अब अमेरिका (America) की सड़कों तक पहुंच गया है। डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों, बढ़ती महंगाई और ईरान के साथ चल रहे संघर्ष के विरोध में देशभर में ‘नो किंग्स’ प्रदर्शन ने जोर पकड़ लिया है, जिसमें लाखों लोग सड़कों पर उतर आए।
30वें दिन में पहुंचा पश्चिम एशिया का संघर्ष
ईरान, अमेरिका और इजरायल (America and Israel) के बीच जारी संघर्ष अब और खतरनाक होता जा रहा है। मिसाइल और ड्रोन हमलों के बीच यह टकराव 30वें दिन में प्रवेश कर चुका है, जिससे पूरे क्षेत्र में तनाव चरम पर बना हुआ है।
‘नो किंग्स’ आंदोलन में उमड़ी भीड़
अमेरिका के कई हिस्सों में शनिवार को ‘नो किंग्स’ प्रदर्शन आयोजित किए गए, जिनमें लाखों लोगों ने हिस्सा लिया। प्रदर्शनकारियों ने ट्रंप प्रशासन की नीतियों, बढ़ती महंगाई और ईरान युद्ध के खिलाफ खुलकर विरोध जताया।खास बात यह रही कि इन प्रदर्शनों में रिपब्लिकन और डेमोक्रेट—दोनों विचारधाराओं के लोग शामिल हुए।
नारे, तख्तियां और मार्च के जरिए विरोध
प्रदर्शन के दौरान लोगों ने नारे लगाए, तख्तियां दिखाई और गीत-संगीत के जरिए अपनी बात रखी। न्यूयॉर्क सिटी में मिडटाउन मैनहटन (Midtown Mainhatan) से बड़े मार्च निकाले गए, जहां आप्रवासन नीति और ईरान संघर्ष के खिलाफ आवाज उठी। वहीं सैन फ्रांसिस्को में एम्बारकाडेरो प्लाजा से सिविक सेंटर तक रैली निकाली गई, जिसमें अलग-अलग सामाजिक मुद्दों के समर्थन में बैनर भी नजर आए।
मिनेसोटा में बड़ी रैली और हस्तियों की मौजूदगी
मिनेसोटा के सेंट पॉल में बड़ी रैली आयोजित की गई, जहां ब्रूस स्प्रिंगस्टीन ने प्रस्तुति दी। उन्होंने राज्य को पूरे देश के लिए प्रेरणा बताया। इस दौरान स्थानीय नेतृत्व ने भी फेडरल नीतियों की आलोचना करते हुए लोगों के समर्थन और एकजुटता की सराहना की।
तीसरी लहर बना ‘नो किंग्स’ आंदोलन
यह ‘नो किंग्स’ प्रदर्शनों की तीसरी लहर मानी जा रही है। इससे पहले भी ऐसे बड़े विरोध प्रदर्शन हो चुके हैं, जिनमें लाखों लोगों ने हिस्सा लिया था। इन प्रदर्शनों के पीछे महंगाई, ईंधन की बढ़ती कीमतें और आर्थिक सुस्ती जैसे मुद्दे प्रमुख कारण रहे हैं।
कुछ जगहों पर हल्का तनाव, लेकिन प्रदर्शन शांतिपूर्ण
फ्लोरिडा के वेस्ट पाम बीच में प्रदर्शनकारियों और ट्रंप समर्थकों के बीच हल्की बहस देखने को मिली, लेकिन कुल मिलाकर पूरे देश में प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहे। लोगों ने लोकतांत्रिक तरीके से अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए।
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अमेरिकी राजनीति पर बढ़ता दबाव
इन प्रदर्शनों ने साफ कर दिया है कि विदेश नीति और घरेलू महंगाई जैसे मुद्दों पर अमेरिकी जनता में असंतोष बढ़ रहा है। आने वाले समय में यह आंदोलन अमेरिका की राजनीति और नीतियों पर बड़ा असर डाल सकता है।
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