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Adani: 28 साल की लीज में बड़ा सौदा

Dhanarekha
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Adani: 28 साल की लीज में बड़ा सौदा

पनवेल वेयरहाउस से बदली लॉजिस्टिक्स रणनीति

नई दिल्ली: अडानी(Adani) ग्रुप की लॉजिस्टिक्स इकाई ने लंबी अवधि के वेयरहाउस समझौते के जरिए बाजार का ध्यान खींचा है। यह सौदा मुंबई(Mumbai) के पास पनवेल क्षेत्र में किया गया है। इस करार में वेयरहाउस को 28 साल की अवधि के लिए किराये पर दिया गया है, जिससे लॉजिस्टिक्स और रिटेल सेक्टर में दीर्घकालिक रणनीति का संकेत मिलता है। शुरुआती किराया और तय बढ़ोतरी ने इस डील को खास बना दिया है।

इस समझौते के तहत अडानी लॉजिस्टिक्स लिमिटेड और एवेन्यू सुपरमार्ट्स लिमिटेड के बीच साझेदारी हुई है। पनवेल स्थित संपत्ति रायगढ़(Raigad) जिले के धरना कैंप इलाके में है। यहां हर महीने 20 लाख रुपये से अधिक का किराया तय किया गया है। इसके अलावा यह सौदा रिटेल सप्लाई चेन को मजबूत करने की दिशा में अहम माना जा रहा है, हालांकि इसमें जोखिम और प्रतिबद्धताएं भी शामिल हैं

लीज की शर्तें और वित्तीय ढांचा

वेयरहाउस के लिए कुल 66,250 वर्ग फुट जगह सब-लीज पर दी गई है। शुरुआत में किराया 20.20 लाख रुपये प्रति माह तय किया गया है। छह साल का लॉक-इन पीरियड यह दर्शाता है कि दोनों पक्ष लंबे समय तक इस समझौते को निभाने के लिए तैयार हैं।

किराये में हर तीन साल पर 12 प्रतिशत की बढ़ोतरी तय की गई है। यह व्यवस्था लंबी अवधि में संपत्ति मालिक को स्थिर आय सुनिश्चित करती है। वहीं किरायेदार को भी भविष्य की लागत का स्पष्ट अनुमान मिल जाता है, जिससे योजना बनाना आसान होता है।

पनवेल की रणनीतिक अहमियत

पनवेल क्षेत्र लॉजिस्टिक्स के लिहाज से तेजी से उभरता केंद्र बन गया है। यह मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे और प्रमुख बंदरगाहों के नजदीक स्थित है। इसलिए रिटेल और ई-कॉमर्स कंपनियों के लिए यह स्थान आकर्षक माना जाता है।

इसके अलावा यह इलाका ग्राहकों के करीब होने के कारण डिलीवरी समय घटाने में मदद करता है। इससे इन्वेंटरी प्रबंधन बेहतर होता है और परिचालन लागत पर नियंत्रण रहता है। इसलिए ऐसे वेयरहाउस सौदे भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर किए जा रहे हैं।

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दोनों कंपनियों को क्या फायदा

अडानी लॉजिस्टिक्स के लिए यह डील स्थायी नकदी प्रवाह का स्रोत बनती है। लॉन्ग टर्म लीज से कंपनी अपनी संपत्तियों का अधिकतम उपयोग कर पा रही है। इससे लॉजिस्टिक्स सेक्टर में उसकी स्थिति और मजबूत होती है।

एवेन्यू सुपरमार्ट्स के लिए यह वेयरहाउस सप्लाई चेन को सुदृढ़ करने का जरिया है। रिटेल विस्तार के साथ भंडारण क्षमता बढ़ाना जरूरी हो जाता है। इस तरह का निवेश परिचालन दक्षता और प्रतिस्पर्धा दोनों को बढ़ाता है।

इस लीज समझौते का लॉजिस्टिक्स बाजार पर क्या असर होगा

लंबी अवधि के करार से स्थिरता आती है। इससे अन्य कंपनियों को भी ऐसे सौदे करने का भरोसा मिलता है। वेयरहाउसिंग सेक्टर में निवेश बढ़ने की संभावना बनती है।

किराये में तय बढ़ोतरी से रिटेलर को क्या चुनौती होगी

समय के साथ लागत बढ़ेगी। लेकिन पहले से तय शर्तों से योजना बनाना आसान रहता है। बिक्री और संचालन में सुधार कर इसका संतुलन साधा जा सकता है।

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