सीटों पर एक्स्ट्रा चार्ज को लेकर छिड़ी जंग
नई दिल्ली: नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने यात्रियों(Air Travelers) की सुविधा के लिए एक बड़ा फैसला लिया है, जिसके तहत अब घरेलू उड़ानों में कम से कम 60% सीटें बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के बुक की जा सकेंगी। वर्तमान में केवल 20% सीटें ही फ्री होती हैं, जबकि बाकी सीटों के लिए एयरलाइंस ‘प्रेफर्ड सीट’ के नाम पर ₹500 से ₹3000 तक वसूलती हैं। नए नियमों के अनुसार, एक ही PNR पर यात्रा करने वाले लोगों को साथ या आस-पास की सीटें देना भी अनिवार्य होगा।
एयरलाइंस का विरोध: किराए में 10-15% बढ़ोतरी की चेतावनी
इंडिगो, एअर इंडिया और स्पाइस जेट जैसी बड़ी एयरलाइंस का प्रतिनिधित्व(Representation) करने वाली फेडरेशन ऑफ इंडियन एयरलाइंस(Air Travelers) ने इस फैसले का कड़ा विरोध किया है। एयरलाइंस का तर्क है कि वे पहले से ही बहुत कम मुनाफे पर काम कर रही हैं और सीटों के चयन से होने वाली कमाई उनके बिजनेस मॉडल का अहम हिस्सा है। उनका कहना है कि अगर सरकार ने यह फैसला वापस नहीं लिया, तो उन्हें घाटे की भरपाई के लिए बेस फेयर (मूल किराया) बढ़ाना पड़ेगा, जिससे सभी यात्रियों पर बोझ पड़ेगा।
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लागत का दबाव और भविष्य की चुनौती
एयरलाइंस का कहना है कि ईंधन, रखरखाव और एयरपोर्ट शुल्क लगातार बढ़ रहे हैं। ऐसे में कमाई के वैकल्पिक रास्तों(Air Travelers) पर रोक लगाने से उनकी वित्तीय स्थिति बिगड़ सकती है। मंत्रालय ने यह निर्देश यात्रियों की उन शिकायतों के बाद दिया है जिनमें वेब चेक-इन के दौरान फ्री सीटों के विकल्प न मिलने और पसंदीदा सीट के नाम पर भारी वसूली की बात कही गई थी। अब देखना यह होगा कि सरकार यात्रियों के हित और एयरलाइंस के मुनाफे के बीच कैसे संतुलन बनाती है।
सरकार के नए नियम से आम हवाई यात्रियों को क्या सीधा फायदा होगा?
सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि यात्रियों को वेब चेक-इन के समय ज्यादा फ्री सीटें मिलेंगी (60% तक)। साथ ही, एक ही टिकट (PNR) पर परिवार के साथ यात्रा करने वालों को अब अलग-अलग बैठने की मजबूरी नहीं होगी, उन्हें पास की सीटें दी जाएंगी।
एयरलाइंस इस फैसले का विरोध क्यों कर रही हैं?
एयरलाइंस का मानना है कि सीट चयन शुल्क उनकी कमाई का एक वैध जरिया है। इस पर रोक लगने से उनकी आय कम होगी, जिससे उन्हें मजबूरी में हवाई टिकट के दामों में बढ़ोतरी करनी पड़ेगी।
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