Anil Ambani: अनिल अंबानी केस: सुप्रीम कोर्ट की ED-CBI को फटकार

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Anil Ambani
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बिना अनुमति विदेश जाने पर रोक

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने ₹40 हजार करोड़ के कथित बैंक धोखाधड़ी मामले(Anil Ambani) में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) और प्रवर्तन निदेशालय (ED) के रवैये पर कड़ी नाराजगी जताई है। चीफ जस्टिस सूर्यकांत(Suryakant) की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा कि एजेंसियां जांच में हो रही देरी का कोई ठोस कारण नहीं बता सकी हैं। कोर्ट ने साफ चेतावनी दी कि अब इस मामले में और ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। साथ ही, दोनों एजेंसियों को अगले चार हफ्तों के भीतर इस मामले पर ताज़ा ‘स्टेटस रिपोर्ट’ दाखिल करने का आदेश दिया गया है

देश छोड़ने पर रोक और सायफनिंग के आरोप

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने यह सुनिश्चित(Ensure) किया कि अनिल अंबानी बिना अदालती अनुमति के देश छोड़कर नहीं जाएंगे। सॉलिसिटर जनरल(Anil Ambani) तुषार मेहता ने कोर्ट को बताया कि अनिल अंबानी के खिलाफ पहले ही ‘लुकआउट सर्कुलर’ जारी किया जा चुका है। ED के मुताबिक, रिलायंस ग्रुप की कंपनियों के जरिए लगभग ₹40,000 करोड़ की हेराफेरी (सायफनिंग) की गई है, जिसमें से अपराध की कमाई ₹20,000 करोड़ से अधिक आंकी गई है। एजेंसी अब तक ₹8,078 करोड़ की संपत्ति अस्थायी रूप से अटैच कर चुकी है।

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फंड डायवर्जन और ‘जानबूझकर’ की गई गड़बड़ियां

याचिका के अनुसार, 2013-17 के बीच रिलायंस की कंपनियों ने बैंकों से जो कर्ज लिया, उसका इस्तेमाल तय उद्देश्यों के बजाय दूसरी शेल कंपनियों(Anil Ambani) या ग्रुप की अन्य फर्मों में फंड ट्रांसफर करने के लिए किया गया। ED की जांच में सामने आया है कि यस बैंक से लिए गए फंड्स में बड़े पैमाने पर ‘इंटेंशनल कंट्रोल फेल्योर’ हुआ, जहां लोन उसी दिन बिना किसी फील्ड चेक या उचित दस्तावेजों के मंजूर कर दिए गए। हालांकि, अंबानी के वकीलों का तर्क है कि यह मामला केवल व्यावसायिक घाटे और कर्ज चूक का है, जिसे आपराधिक रंग नहीं दिया जाना चाहिए।

याचिकाकर्ता ने अनिल अंबानी के खिलाफ क्या मुख्य आरोप लगाए हैं?

याचिका में आरोप लगाया गया है कि 2007-08 से ही फ्रॉड चल रहा था। मुख्य रूप(Anil Ambani) से 2013-17 के बीच SBI और अन्य बैंकों से लिए गए ₹40,000 करोड़ से अधिक के लोन का गलत इस्तेमाल हुआ और उसे ग्रुप की दूसरी कंपनियों में डायवर्ट किया गया, जो बाद में NPA बन गया।

ED ने अपनी जांच में ‘लोन अप्रूवल प्रोसेस’ को लेकर क्या खुलासा किया है?

ED ने पाया कि रिलायंस होम फाइनेंस और रिलायंस कॉमर्शियल फाइनेंस में नियमों की धज्जियां उड़ाई गईं। कई लोन उसी दिन बिना किसी वेरिफिकेशन या मीटिंग के मंजूर और डिस्बर्स कर दिए गए। एजेंसी ने इसे ‘जानबूझकर किया गया कंट्रोल फेल्योर’ करार दिया है।

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