Bharat Taxi: भारत टैक्सी का आगाज

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ड्राइवरों के लिए ओला-उबर से आजादी और यात्रियों को सस्ती राइड

नई दिल्ली: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह आज दिल्ली में देश की पहली सहकारी कैब सर्विस ‘भारत टैक्सी'(Bharat Taxi) को लॉन्च करेंगे। इस सेवा की सबसे क्रांतिकारी बात(Revolutionary thing) इसका ‘जीरो-कमीशन’ मॉडल है। निजी कंपनियों (ओला-उबर) के विपरीत, जो ड्राइवरों से 20-30% कमीशन लेती हैं, भारत टैक्सी ड्राइवरों से कोई कमीशन नहीं लेगी। यहाँ ड्राइवर सिर्फ एक कर्मचारी नहीं, बल्कि प्लेटफॉर्म के हिस्सेदार और मालिक होंगे। उन्हें हर राइड की 100% कमाई मिलेगी, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति में बड़ा सुधार होगा

यात्रियों को सर्ज-प्राइसिंग से राहत और सुरक्षा

यात्रियों के लिए भारत टैक्सी एक किफायती विकल्प(Affordable Options) साबित होगी क्योंकि इसमें ‘सर्ज-प्राइसिंग’ (व्यस्त समय में बढ़ी हुई कीमतें) का सिस्टम(Bharat Taxi) नहीं होगा। इसका मोबाइल ऐप हिंदी, अंग्रेजी, गुजराती और मराठी भाषाओं में उपलब्ध होगा। इसके अलावा, महिला सुरक्षा और सशक्तीकरण पर ध्यान देते हुए पहले चरण में 100 ‘महिला सारथी’ (ड्राइवर्स) को जोड़ा जा रहा है, जिनकी संख्या 2030 तक 15,000 करने का लक्ष्य है। ड्राइवरों के लिए दिल्ली में 7 विशेष सपोर्ट सेंटर भी बनाए गए हैं।

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भविष्य का रोडमैप और सामाजिक सुरक्षा

सहकार टैक्सी कोऑपरेटिव लिमिटेड द्वारा संचालित यह सेवा ₹300 करोड़ की पूंजी के साथ शुरू हुई है। सरकार का लक्ष्य अगले दो साल में इसे देश(Bharat Taxi) के हर प्रमुख शहर तक पहुँचाना है। 2028-2030 तक यह सेवा जिला मुख्यालयों और गांवों तक 1 लाख ड्राइवरों के साथ विस्तार करेगी। इसमें शामिल ड्राइवरों को ₹5 लाख का दुर्घटना बीमा, ₹5 लाख का फैमिली हेल्थ कवर और रिटायरमेंट सेविंग्स जैसी सुविधाएं दी जाएंगी, जो इस सहकारी मॉडल को पूरी तरह से कल्याणकारी बनाती हैं।

भारत टैक्सी ड्राइवरों के लिए निजी एग्रीगेटर कंपनियों से बेहतर कैसे है?

निजी कंपनियां ड्राइवरों की कमाई(Bharat Taxi) का एक बड़ा हिस्सा (25-30%) कमीशन के रूप में काट लेती हैं, जबकि भारत टैक्सी में ड्राइवर को 100% कमाई मिलती है। इसके अलावा, ड्राइवरों को कंपनी के शेयर सर्टिफिकेट और सामाजिक सुरक्षा (बीमा और पेंशन) भी दी जा रही है।

भारत टैक्सी का विस्तार आने वाले वर्षों में कैसे होगा?

मार्च 2026 तक यह राजकोट, मुंबई और पुणे में शुरू होगी। 2027 तक लखनऊ, भोपाल और जयपुर जैसे 20 शहरों में फैलेगी और 2030 तक 1 लाख ड्राइवरों के साथ पूरे भारत के गांवों और जिला मुख्यालयों तक पहुँचने का लक्ष्य है।

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