सोना ₹1.67 लाख और चांदी ₹2.90 लाख के पार
नई दिल्ली: मध्य पूर्व में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते युद्ध(Bullion Market) के खतरों ने वैश्विक अर्थव्यवस्था में अनिश्चितता पैदा कर दी है। निवेशक ऐसे अस्थिर माहौल में शेयर बाजार के बजाय सोने को सबसे सुरक्षित निवेश (Safe Haven) मानते हैं, जिसके कारण इसकी मांग में भारी उछाल आया है। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के अनुसार, महज एक दिन में सोने की कीमतों में ₹8,000 की तेजी दर्ज की गई है, जो इसकी बढ़ती वैश्विक मांग और सुरक्षा की भावना को दर्शाता है।
बढ़ती कीमतों के पीछे के प्रमुख आर्थिक कारक
सोने-चांदी की कीमतों में इस रिकॉर्ड तोड़ वृद्धि के तीन मुख्य कारण हैं। पहला, मिडिल ईस्ट और रूस-यूक्रेन संकट के कारण उपजा भू-राजनीतिक(Bullion Market) तनाव। दूसरा, अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में कटौती के संकेत, जिससे डॉलर के मुकाबले सोने का आकर्षण(Attraction) बढ़ जाता है। और तीसरा, पिछले दिनों आई गिरावट के बाद निवेशकों और ज्वेलर्स द्वारा निचले स्तर पर की गई बड़े पैमाने पर खरीदारी, जिसने कीमतों को ऊपर की ओर धकेल दिया है।
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भविष्य का अनुमान और शुद्धता की पहचान
कमोडिटी विशेषज्ञों का मानना है कि यदि तनाव इसी तरह जारी रहा, तो सोना ₹1.90 लाख और चांदी ₹3.50 लाख के स्तर को छू सकती है। इस भारी निवेश(Bullion Market) के बीच विशेषज्ञों ने ग्राहकों को सचेत किया है कि वे केवल BIS हॉलमार्क वाले सर्टिफाइड गोल्ड ही खरीदें। चांदी की शुद्धता जांचने के लिए मैग्नेट और आइस टेस्ट जैसे सरल घरेलू तरीके अपनाए जा सकते हैं ताकि इस महंगे दौर में मिलावट से बचा जा सके।
युद्ध जैसी स्थितियों में सोने की कीमतें अचानक क्यों बढ़ जाती हैं?
अनिश्चितता और युद्ध के समय मुद्रा और शेयर बाजार में जोखिम बढ़ जाता है। सोना एक ‘भौतिक संपत्ति’ है जिसकी अपनी वैल्यू होती है, इसलिए निवेशक अपनी पूंजी बचाने के लिए सोने में पैसा लगाने लगते हैं। अधिक मांग के कारण कीमतें तेजी से बढ़ती हैं।
असली चांदी की पहचान करने के लिए ‘आइस टेस्ट’ (Ice Test) कैसे काम करता है?
चांदी ऊष्मा (Heat) की सबसे अच्छी सुचालक होती है। जब असली चांदी पर बर्फ का टुकड़ा रखा जाता है, तो वह कमरे के तापमान पर रखी किसी अन्य धातु की तुलना में बहुत अधिक तेजी से पिघलता है क्योंकि चांदी तेजी से बर्फ को ऊष्मा स्थानांतरित करती है।
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