Breaking News: Dark Patterns: ई-कॉमर्स पर ‘डार्क पैटर्न’ की जाँच

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कैश ऑन डिलीवरी पर अतिरिक्त शुल्क लगाना गलत

नई दिल्ली: भारत सरकार ने ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स द्वारा कैश ऑन डिलीवरी (COD) ऑर्डर्स पर अतिरिक्त शुल्क (एक्स्ट्रा चार्ज) लगाने के मामले में औपचारिक जाँच शुरू कर दी है। उपभोक्ता मामलों के मंत्री प्रह्लाद जोशी ने इस प्रथा को एक प्रकार का ‘डार्क पैटर्न'(Dark Patterns) बताया है, जो नियमों का उल्लंघन है। मंत्री के अनुसार, COD पर ज्यादा पैसे वसूलना ‘ड्रिप प्राइसिंग’ का एक उदाहरण है। ड्रिप प्राइसिंग उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के तहत परिभाषित 13 ‘डार्क पैटर्न्स”(Dark Patterns) में से एक है। ऐसी शिकायतें सामने आई थीं कि जेप्टो जैसे प्लेटफॉर्म्स चेकआउट के अंतिम चरण में ‘कैश हैंडलिंग फीस’(Cash Handling Fee) के नाम पर छिपे हुए शुल्क जोड़ रहे थे। सरकार का कहना है कि ग्राहकों के अधिकारों का उल्लंघन करने वाले प्लेटफॉर्म्स के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी ताकि ई-कॉमर्स क्षेत्र में पूरी पारदर्शिता बनी रहे

‘डार्क पैटर्न्स’ और उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम

‘डार्क पैटर्न”(Dark Patterns) ऐसे भ्रामक तरीके होते हैं जिनका उपयोग ऑनलाइन कंपनियाँ ग्राहकों को ऐसे निर्णय लेने के लिए करती हैं जो उनके हित में नहीं होते। COD पर एक्स्ट्रा चार्ज (ड्रिप प्राइसिंग) के अलावा, सबसे अधिक प्रचलित डार्क पैटर्न्स में शामिल हैं:

फॉल्स अर्जेंसी : ग्राहकों पर जल्दी निर्णय लेने का दबाव बनाने के लिए “केवल 1 आइटम बचा है” जैसे झूठे संदेश दिखाना।

सब्सक्रिप्शन ट्रैप्स: ग्राहक के लिए मेंबरशिप या सब्सक्रिप्शन को आसानी से रद्द न करने देना।

उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम (Consumer Protection Act) के तहत, इन तरीकों को अपनाना नियमों का स्पष्ट उल्लंघन माना जाता है। जाँच में दोषी पाए जाने पर, ई-कॉमर्स कंपनियों पर अधिनियम के तहत जुर्माना और अन्य आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जा सकती है, क्योंकि ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों ही खरीदारी में उपभोक्ताओं को एक जैसे कानूनी अधिकार प्राप्त होते हैं।

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ऑनलाइन खरीदारी में ग्राहक अधिकार और सुरक्षित अभ्यास

ऑनलाइन खरीदारी करते समय ग्राहकों के पास डिफेक्टिव सामान को लौटाने का पूरा अधिकार है। यदि डिफेक्टिव या गलत प्रोडक्ट मिलता है, तो ग्राहक को तुरंत फोटो/वीडियो सबूत बनाकर वेबसाइट पर रिटर्न रिक्वेस्ट दर्ज करनी चाहिए। हालांकि, बिना कारण बताए सामान लौटाने का अधिकार पूरी तरह से कंपनी की रिटर्न पॉलिसी (जैसे ‘नो-क्वेश्चन रिटर्न’ सुविधा) पर निर्भर करता है। यदि कंपनी रिफंड देने में आनाकानी करती है, तो ग्राहक को ऑर्डर की रसीद और कस्टमर केयर चैट/कॉल रिकॉर्ड्स जैसे सभी रिकॉर्ड संभालकर रखने चाहिए, ताकि आगे शिकायत की जा सके। सुरक्षित ऑनलाइन शॉपिंग के लिए, ग्राहकों को हमेशा विश्वसनीय वेबसाइट्स (HTTPS) का चयन करना चाहिए, ग्राहक रिव्यू पढ़ने चाहिए, और खरीदारी से पहले रिटर्न/रिफंड पॉलिसी को ध्यान से पढ़ना चाहिए।

‘डार्क पैटर्न’ क्या होते हैं, और सीओडी पर अतिरिक्त शुल्क लगाना किस प्रकार के डार्क पैटर्न का उदाहरण है?

‘डार्क पैटर्न”(Dark Patterns) ऑनलाइन कंपनियाँ द्वारा उपयोग किए जाने वाले भ्रामक तरीके होते हैं जो ग्राहकों को उनके सर्वोत्तम हित के विपरीत निर्णय लेने के लिए प्रेरित करते हैं। सीओडी (कैश ऑन डिलीवरी) पर अतिरिक्त शुल्क लगाना ‘ड्रिप प्राइसिंग’ का उदाहरण है, जिसमें छिपे हुए शुल्क ऑर्डर के अंतिम चरण में जोड़े जाते हैं।

यदि कोई ई-कॉमर्स कंपनी रिफंड देने में लगातार देरी या आनाकानी करे तो ग्राहक को क्या कदम उठाने चाहिए?

सबसे पहले ग्राहक को ऑर्डर की रसीद, कस्टमर केयर कॉल/चैट के स्क्रीनशॉट, और ईमेल प्रूफ जैसे सभी रिकॉर्ड्स को संभालकर रखना चाहिए। यदि कंपनी बार-बार रिफंड टालती है या जवाब नहीं देती है, तो ग्राहक को उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के तहत उपभोक्ता शिकायत दर्ज करने जैसे अगले कानूनी कदम उठाने चाहिए।

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