ड्यूटी कटौती से सरकार को ₹1 लाख करोड़ का घाटा
नई दिल्ली: केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार (25 मई) को मुंबई में सिडबी (SIDBI) के 37वें स्थापना दिवस पर देश की आर्थिक रणनीति को स्पष्ट किया। पश्चिम एशिया में जारी तनाव और वैश्विक अस्थिरता के बीच उन्होंने ‘3Fs’ यानी फ्यूल (ईंधन), फर्टिलाइजर (खाद) और फॉरेक्स (विदेशी मुद्रा भंडार) पर ध्यान केंद्रित करने की बात कही। उन्होंने कहा कि कच्चे तेल और खाद की अंतरराष्ट्रीय कीमतें कल्पना से परे बढ़ चुकी हैं, जिससे बाहरी मोर्चे पर चुनौतियां पैदा हो रही हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी आश्वस्त किया कि तमाम चुनौतियों के बावजूद भारत की घरेलू अर्थव्यवस्था बेहद मजबूत और सुरक्षित है।
Finance Minister: एक्साइज ड्यूटी में कटौती और राजस्व का नुकसान
ईंधन की आसमान छूती कीमतों से आम जनता को राहत देने के लिए सरकार द्वारा एक्साइज ड्यूटी (उत्पाद शुल्क) में की गई कटौती का जिक्र करते हुए वित्त मंत्री ने बताया कि इस फैसले से सरकारी खजाने को करीब ₹1 लाख करोड़ का राजस्व घाटा होगा। उन्होंने उन आलोचकों को भी करारा जवाब दिया जो देश में डर और निराशा का माहौल बनाने की कोशिश कर रहे हैं। सीतारमण ने स्पष्ट किया कि पेट्रोल-डीजल की कीमतों को स्थिर रखने के लिए केंद्र सरकार ने पहले ही उत्पाद शुल्क में ₹10-10 की भारी कटौती की थी, ताकि वैश्विक महंगाई का असर घरेलू विकास पर कम से कम पड़े।
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MSME का रुका हुआ पेमेंट और 45 दिनों का नियम
वित्त मंत्री ने एमएसएमई (MSME) सेक्टर की आर्थिक चुनौतियों पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए बताया कि लगभग ₹8.1 लाख करोड़ का भुगतान देरी की वजह से अटका हुआ है। इससे छोटे उद्योगों की वर्किंग कैपिटल और विकास की गति प्रभावित हो रही है। उन्होंने सरकारी कंपनियों और बड़े संस्थानों से आग्रह किया कि वे एमएसएमई से जुड़ी सेवाओं या सामान के भुगतान के लिए 45 दिनों की अनिवार्य समय-सीमा का कड़ाई से पालन करें। इस दौरान उन्होंने ऑयल मार्केटिंग कंपनियों द्वारा पिछले 10 दिनों में चौथी बार की गई ईंधन बढ़ोतरी के संदर्भ में प्रधानमंत्री मोदी की ‘किफायत’ बरतने वाली अपील का भी समर्थन किया।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा बताए गए ‘3Fs’ का क्या अर्थ है और ये भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण हैं?
3Fs का अर्थ है फ्यूल (Fuel), फर्टिलाइजर (Fertilizer) और फॉरेक्स (Forex)। भारत अपनी जरूरत का 85% तेल और बड़ी मात्रा में खाद आयात करता है। वैश्विक संकट के कारण इनकी कीमतें बढ़ने से महंगाई और सब्सिडी का बोझ बढ़ता है, जबकि आयात बिलों के भुगतान के लिए मजबूत विदेशी मुद्रा भंडार (फॉरेक्स) का होना आवश्यक है।
MSME सेक्टर के लिए भुगतान से जुड़ा ’45 दिनों का नियम’ क्या है?
सरकारी नियमों के अनुसार, किसी भी बड़ी कंपनी या सरकारी संस्थान को छोटे उद्योगों (MSME) से सामान या सेवाएं लेने के बाद 45 दिनों के भीतर उनका भुगतान करना अनिवार्य है। इसका उद्देश्य छोटे व्यवसायों में नकदी के प्रवाह (Cash Flow) को सुनिश्चित करना है।
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