इंटेलीस्मार्ट सौदे की दौड़ तेज
नई दिल्ली: भारत(India) की प्रमुख स्मार्ट मीटर कंपनी इंटेलीस्मार्ट इंफ्रास्ट्रक्चर अब बड़े निवेशकों के लिए आकर्षण का केंद्र बन गई है। कंपनी की बिक्री प्रक्रिया अंतिम चरण में पहुंच चुकी है और अडानी समूह सहित चार बड़ी कंपनियां इस दौड़ में बनी हुई हैं। इस संभावित सौदे का मूल्य करीब 3770 करोड़ रुपये आंका जा रहा है। स्मार्ट मीटर सेक्टर में बढ़ती मांग के कारण इस डील को काफी अहम माना जा रहा है।
चार कंपनियों के बीच कड़ी प्रतिस्पर्धा
अडानी एनर्जी सॉल्यूशंस(Adani) और जीएमआर(GMR) समेत चार कंपनियों को अगले दौर के लिए चुना गया है। इनमें जीनस पावर इंफ्रास्ट्रक्चर और स्विस फंड पार्टनर्स ग्रुप भी शामिल हैं। सभी कंपनियों ने अब इंटेलीस्मार्ट की वित्तीय और कानूनी जांच शुरू कर दी है। वहीं अंतिम और बाध्यकारी बोलियां अगले महीने तक जमा किए जाने की संभावना जताई जा रही है। इसके अलावा शुरुआती चरण में करीब 10 कंपनियों ने इस सौदे में दिलचस्पी दिखाई थी।
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कर्ज घटाने की तैयारी तेज
इंटेलीस्मार्ट फिलहाल एनआईआईएफ और ईईएसएल का संयुक्त उपक्रम है। कंपनी को देशभर में करीब 2.2 करोड़ स्मार्ट मीटर लगाने के ऑर्डर मिल चुके हैं। असम(Assam) और उत्तर प्रदेश(Uttar Pradesh) जैसे राज्यों में लाखों स्मार्ट मीटर पहले ही लगाए जा चुके हैं। हालांकि ईईएसएल पर बढ़ते कर्ज के कारण हिस्सेदारी बेचने की योजना बनाई गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस सौदे से भारत में स्मार्ट ऊर्जा प्रबंधन और डिजिटल बिजली वितरण को नई रफ्तार मिल सकती है।
इंटेलीस्मार्ट कंपनी क्या काम करती है?
IntelliSmart देशभर में बिजली वितरण कंपनियों के लिए स्मार्ट मीटर लगाने और डिजिटल ऊर्जा प्रबंधन सेवाएं उपलब्ध कराती है। कंपनी का उद्देश्य बिजली खपत की निगरानी और बिलिंग प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाना है।
इस सौदे से ऊर्जा क्षेत्र पर क्या असर होगा?
विशेषज्ञों के अनुसार इस अधिग्रहण से स्मार्ट मीटर सेक्टर में निवेश और प्रतिस्पर्धा बढ़ सकती है। इससे बिजली वितरण व्यवस्था को आधुनिक बनाने और उपभोक्ताओं को बेहतर सेवाएं देने में मदद मिलने की उम्मीद है।
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