कीमतों में भारी गिरावट और मौजूदा भाव
नई दिल्ली: लगातार दो दिनों की बढ़त के बाद, आज 5 फरवरी को सोने और चांदी(Gold Silver) की कीमतों में बड़ी गिरावट देखी गई है। वायदा बाजार (MCX) में चांदी की कीमत लगभग ₹28,000 (11%) गिरकर ₹2.40 लाख प्रति किलो पर आ गई है। वहीं, सोने के भाव में भी ₹3,000 की कमी आई है, जिससे 10 ग्राम सोने की कीमत ₹1.50 लाख के करीब पहुंच गई है। सर्राफा बाजार में भी इसी तरह का रुझान है, जहां चांदी ₹2.52 लाख और सोना ₹1.53 लाख के स्तर पर कारोबार कर रहा है।
गिरावट के मुख्य कारण: मार्जिन मनी और प्रॉफिट बुकिंग
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, इस गिरावट की मुख्य वजह शिकागो मर्केंटाइल एक्सचेंज (CME) द्वारा मार्जिन मनी में की गई बढ़ोतरी है। सोने पर मार्जिन 6% से बढ़ाकर 8% और चांदी(Gold Silver) पर 11% से बढ़ाकर 15% कर दिया गया है। जब मार्जिन बढ़ता है, तो ट्रेडर्स को सौदे बनाए रखने के लिए अतिरिक्त पैसे देने पड़ते हैं; फंड की कमी होने पर वे अपनी होल्डिंग्स बेचने लगते हैं, जिससे कीमतों पर दबाव आता है। इसके अलावा, रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचे भावों के बाद निवेशकों द्वारा की गई ‘प्रॉफिट बुकिंग’ ने भी कीमतों को नीचे धकेला है।
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खरीदारों के लिए सुरक्षा और शुद्धता के उपाय
बाजार में उतार-चढ़ाव के बीच, ज्वेलरी खरीदते समय ग्राहकों को सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। हमेशा ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड(Gold Silver) हॉलमार्क वाला ‘सर्टिफाइड गोल्ड’ ही खरीदना चाहिए ताकि शुद्धता सुनिश्चित हो सके। चांदी की शुद्धता जांचने के लिए मैग्नेट टेस्ट (असली चांदी चुंबक से नहीं चिपकती) और आइस टेस्ट (असली चांदी पर बर्फ तेजी से पिघलती है) जैसे घरेलू तरीके अपनाए जा सकते हैं। खरीदारी से पहले इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन की वेबसाइट पर जाकर भाव क्रॉस-चेक करना फायदेमंद रहता है।
वायदा बाजार (MCX) और सर्राफा बाजार की कीमतों में अंतर क्यों होता है?
MCX एक ऑनलाइन ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म है जहां कीमतें मांग और आपूर्ति के आधार पर हर सेकंड बदलती हैं। वहीं, सर्राफा बाजार में फिजिकल सोना-चांदी(Gold Silver) मिलता है, जिसमें ट्रांसपोर्टेशन, मेकिंग चार्ज और स्टोरेज की लागत जुड़ी होती है, इसलिए वहां के दाम थोड़े अलग होते हैं।
मार्जिन मनी बढ़ने से कीमतों पर क्या असर पड़ता है?
मार्जिन बढ़ने का मतलब है कि ट्रेडर्स को अब ज्यादा सिक्योरिटी मनी जमा करनी होगी। जिनके पास अतिरिक्त पैसे नहीं होते, वे अपना स्टॉक बेचना शुरू कर देते हैं। बाजार में अचानक बिकवाली बढ़ने से कीमतें तेजी से गिरने लगती हैं।
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