ITR: आयकर रिफंड (ITR) में देरी

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24 लाख से ज्यादा ITR अब भी प्रोसेसिंग के इंतजार में

मुंबई: वित्त राज्य मंत्री ने संसद में स्पष्ट किया कि रिटर्न फाइल(ITR) करने वाले 8.80 करोड़ लोगों में से लगभग 24.64 लाख के रिटर्न अभी पेंडिंग हैं। इसके पीछे मुख्य वजह ई-वेरिफिकेशन (e-verify) न होना, बैंक अकाउंट का प्री-वैलिडेट न होना या फिर टैक्सपेयर(Tax Payer) द्वारा घोषित आय और विभाग के पास मौजूद डेटा (AIS/26AS) में अंतर होना है। कभी-कभी डेटा मिलान के दौरान तकनीकी जांच के कारण भी रिफंड में समय लग जाता है

‘नज’ कैंपेन और टैक्सपेयर्स की भागीदारी

सरकार के ‘नज’ (Nudge) कैंपेन ने टैक्स चोरी रोकने और पारदर्शिता(ITR) बढ़ाने में बड़ी भूमिका निभाई है। इस अभियान के तहत विभाग टैक्सपेयर्स को ईमेल या मैसेज भेजकर खुद अपनी गलतियां सुधारने के लिए प्रेरित करता है। आंकड़ों के मुताबिक, 1.11 करोड़ लोगों ने अपनी त्रुटियों को सुधारा, जिससे सरकार को ₹8,810 करोड़ से अधिक का अतिरिक्त राजस्व प्राप्त हुआ। यह पहल विवादों को कम करने और अनुपालन बढ़ाने की दिशा में एक सफल कदम साबित हुई है।

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करदाताओं के लिए जरूरी कदम

यदि आपका रिफंड अटका हुआ है, तो सबसे पहले इनकम(ITR) टैक्स पोर्टल पर अपना ‘रिटर्न स्टेटस’ चेक करें। सुनिश्चित करें कि आपका बैंक खाता प्री-वैलिडेटेड है, अन्यथा पैसा आपके खाते में क्रेडिट नहीं हो पाएगा। इसके अलावा, विभाग की ओर से आए किसी भी नोटिस या मैसेज का समय पर जवाब देना अनिवार्य है। यदि आपने अभी तक ई-वेरिफिकेशन नहीं किया है, तो उसे तुरंत पूरा करें क्योंकि इसके बिना रिटर्न की प्रोसेसिंग शुरू नहीं होती।

‘नज’ (Nudge) कैंपेन क्या है और यह कैसे काम करता है?

‘नज’ कैंपेन आयकर विभाग की एक सॉफ्ट पहल है। इसमें विभाग(ITR) सीधे कार्रवाई करने के बजाय टैक्सपेयर को मैसेज या ईमेल भेजकर प्रेरित करता है कि वे अपने रिटर्न की दोबारा जांच करें। यदि कोई आय छूट गई है, तो टैक्सपेयर उसे खुद सुधार कर अपडेटेड रिटर्न भर सकता है।

रिटर्न प्रोसेस होने के बाद भी रिफंड न मिलने का क्या कारण हो सकता है?

इसका सबसे आम कारण बैंक अकाउंट का ‘प्री-वैलिडेशन’ न होना है। यदि पोर्टल पर आपका बैंक खाता सत्यापित नहीं है, तो विभाग रिफंड जारी नहीं कर पाता। इसके अलावा, यदि पिछले वर्षों का कोई टैक्स बकाया है, तो विभाग उसे रिफंड के साथ एडजस्ट कर सकता है।

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Dhanarekha

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