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Gold: सोना-चांदी रिकॉर्ड ऊंचाई की ओर

Dhanarekha
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Gold: सोना-चांदी रिकॉर्ड ऊंचाई की ओर

एक ही दिन में भारी उछाल, निवेश के सुरक्षित ठिकाने बने

नई दिल्ली: तीन दिनों की गिरावट के बाद 2 जनवरी 2026 को सोने(Gold) और चांदी की कीमतों में जबरदस्त रिकवरी देखी गई है। 24 कैरेट सोने का भाव 954 रुपए बढ़कर 1,34,415 रुपए प्रति 10 ग्राम पर पहुँच गया है। वहीं, चांदी की कीमतों में और भी ज्यादा तेजी दर्ज की गई है, जहाँ एक ही दिन में भाव 5,656 रुपए बढ़कर 2,34,906 रुपए प्रति किलोग्राम हो गया है। विशेषज्ञों(Experts) का मानना है कि यदि यही ट्रेंड जारी रहा, तो इस साल सोना 1.50 लाख और चांदी 2.75 लाख रुपए के स्तर को छू सकती है

दाम बढ़ने के मुख्य वैश्विक और आर्थिक कारण

सोने(Gold) और चांदी में इस तेजी के पीछे कई अंतरराष्ट्रीय कारण सक्रिय हैं। अमेरिका में ब्याज दरें घटने से डॉलर का कमजोर होना और रूस-यूक्रेन जैसे जियोपॉलिटिकल तनाव ने निवेशकों को सोने की ओर मोड़ा है। साथ ही, चीन जैसे देशों के केंद्रीय बैंकों द्वारा भारी मात्रा में सोने की खरीदारी ने मांग को बढ़ाया है। चांदी के मामले में, सोलर पैनल, इलेक्ट्रिक वाहन (EV) और इलेक्ट्रॉनिक्स में बढ़ती औद्योगिक मांग ने इसे केवल एक आभूषण नहीं बल्कि एक अनिवार्य कच्चा माल बना दिया है।

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खरीदारी के समय सावधानियां और शुद्धता की पहचान

सोना(Gold) खरीदते समय ग्राहकों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। हमेशा BIS हॉलमार्क वाला सर्टिफाइड सोना ही खरीदें, जिससे उसकी शुद्धता सुनिश्चित हो सके। हॉलमार्क पर लगा अल्फान्यूमेरिक कोड (जैसे AZ4524) सोने की असलियत बताता है। इसके अलावा, खरीदारी से पहले IBJA जैसे विश्वसनीय स्रोतों से भाव को क्रॉस-चेक करना जरूरी है, क्योंकि 24 कैरेट, 22 कैरेट और 18 कैरेट सोने के रेट अलग-अलग होते हैं और शहरों के हिसाब से मेकिंग चार्ज भी भिन्न हो सकते हैं।

2025 में सोने और चांदी ने कितना रिटर्न दिया?

साल 2025 में सोने(Gold) की कीमतों में 75% की वृद्धि हुई, जबकि चांदी ने निवेशकों को 167% का बंपर रिटर्न दिया। चांदी की कीमत 86,017 रुपए से बढ़कर 2,30,420 रुपए प्रति किलो तक पहुँच गई थी।

चांदी की कीमतों में इतनी अधिक तेजी क्यों आ रही है?

चांदी की तेजी का सबसे बड़ा कारण इसकी औद्योगिक मांग है। सोलर एनर्जी, इलेक्ट्रॉनिक्स और इलेक्ट्रिक वाहनों में चांदी का भारी इस्तेमाल हो रहा है, जिससे इसकी वैश्विक सप्लाई कम और मांग अधिक बनी हुई है।

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