चांदी ₹2 लाख के पार बरकरार
नई दिल्ली: आज यानी 19 दिसंबर को भारतीय सर्राफा बाजार में सोने(Gold) और चांदी की कीमतों में मामूली गिरावट दर्ज की गई है। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के मुताबिक, 24 कैरेट सोने की कीमत ₹80 घटकर ₹1,32,394 प्रति 10 ग्राम पर आ गई है। वहीं, चांदी में ₹784 की गिरावट देखी गई है, जिससे यह ₹2,00,336 प्रति किलो के स्तर पर कारोबार कर रही है। हालांकि यह गिरावट मामूली है, क्योंकि पिछले कुछ दिनों से दोनों धातुएं अपने ऑल-टाइम हाई के करीब बनी हुई हैं।
साल 2025 का सफर: निवेशकों की लगी लॉटरी
यह साल निवेशकों के लिए बेमिसाल(Incomparable) साबित हुआ है। 31 दिसंबर 2024 के मुकाबले अब तक सोने(Gold) की कीमतों में ₹56,232 की बढ़ोतरी हुई है, जबकि चांदी के दाम में ₹1,14,319 का भारी उछाल आया है। इस तेजी के पीछे वैश्विक कारण मुख्य भूमिका निभा रहे हैं। डॉलर का कमजोर होना और रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण पैदा हुए तनाव ने निवेशकों को सुरक्षित निवेश के रूप में सोने की ओर आकर्षित किया है। साथ ही, दुनिया भर के केंद्रीय बैंकों द्वारा सोने की भारी खरीदारी ने इसकी कीमतों को आसमान पर पहुंचा दिया है।
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चांदी की औद्योगिक चमक और सावधानी के मंत्र
चांदी की कीमतों में आई रिकॉर्ड तेजी का मुख्य कारण इसकी इंडस्ट्रियल डिमांड है। सोलर पैनल, इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) और इलेक्ट्रॉनिक्स में चांदी का इस्तेमाल अनिवार्य कच्चा माल बन गया है। इसके अलावा, टैरिफ बढ़ने के डर से अमेरिकी कंपनियों द्वारा स्टॉक जमा करने से ग्लोबल सप्लाई में कमी आई है। विशेषज्ञों की सलाह है कि इस उच्च स्तर पर सोना खरीदते समय हमेशा BIS हॉलमार्क की जांच करें और ज्वेलर्स के मेकिंग चार्ज और GST (3%) को ध्यान में रखकर अलग-अलग शहरों के रेट्स को क्रॉस-चेक जरूर करें।
अलग-अलग शहरों में सोने और चांदी के रेट्स में अंतर क्यों होता है?
IBJA द्वारा जारी किए गए रेट्स ‘बेस रेट’ होते हैं। इनमें 3% GST, मेकिंग चार्जेस और ज्वेलर्स का अपना मुनाफा शामिल नहीं होता। इसके अलावा, राज्यों के स्थानीय टैक्स और ट्रांसपोर्टेशन लागत के कारण दिल्ली, मुंबई और चेन्नई जैसे शहरों में कीमतों में अंतर दिखाई देता है।
क्या अभी सोने में निवेश करना सुरक्षित है, जबकि यह अपने उच्चतम स्तर पर है?
भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक केंद्रीय बैंकों की निरंतर खरीदारी को देखते हुए सोने(Gold) में लंबी अवधि का रुझान सकारात्मक बना हुआ है। हालांकि, मौजूदा रिकॉर्ड स्तरों को देखते हुए एकमुश्त निवेश के बजाय SIP या गोल्ड ETF के माध्यम से किश्तों में निवेश करना अधिक समझदारी भरा और जोखिम कम करने वाला कदम हो सकता है।
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