वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति का अवरोध
नई दिल्ली: ईरान-इजराइल संघर्ष के कारण दुनिया की सबसे महत्वपूर्ण(Hormuz Crisis) समुद्री जीवनरेखा ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ में व्यावसायिक गतिविधियों पर लगभग विराम लग गया है। ‘जॉइंट मैरिटाइम इन्फॉर्मेशन सेंटर’ (JMIC) की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, पिछले 24 घंटों में इस मार्ग से केवल दो जहाज गुजरे हैं और कोई भी तेल टैंकर वहां से नहीं निकला है। मिसाइल और ड्रोन हमलों के बढ़ते डर के कारण शिपिंग ऑपरेटर्स ने अपने जहाजों को रोक दिया है, जिससे वैश्विक स्तर पर 20% कच्चे तेल और एलएनजी (LNG) की आपूर्ति बुरी तरह प्रभावित हुई है।
आर्थिक प्रभाव और ब्रेंट क्रूड की बढ़ती कीमतें
आपूर्ति श्रृंखला में आई इस रुकावट का सीधा असर वैश्विक बाजारों पर पड़ा है, जिससे ब्रेंट क्रूड की कीमतें 84 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई हैं। ऊर्जा विशेषज्ञों(Hormuz Crisis) का अनुमान है कि यदि यह संघर्ष लंबा खिंचता है और होर्मुज मार्ग बंद रहता है, तो कच्चे तेल की कीमत 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती है। वर्तमान में, कई टैंकर फारस की खाड़ी में फंसे हुए हैं या वैकल्पिक और अधिक महंगे लंबे मार्गों की तलाश कर रहे हैं, जो सीधे तौर पर विश्व भर में महंगाई को बढ़ाएंगे।
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रक्षा मंत्री की चिंता: ‘न्यू नॉर्मल’ और ऊर्जा सुरक्षा
भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस स्थिति को वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए अत्यंत चिंताजनक बताया है। उन्होंने कहा कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज ऊर्जा सुरक्षा के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है और यहां आने वाली बाधाएं सीधे भारत की तेल और गैस आपूर्ति को प्रभावित करती हैं। राजनाथ सिंह ने चेतावनी दी है कि संघर्ष की अनिश्चितताएं अब ‘न्यू नॉर्मल’ बनती जा रही हैं, जो न केवल समुद्री व्यापार, बल्कि भविष्य में अंतरिक्ष और साइबर सुरक्षा के लिए भी एक बड़ा खतरा है।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए क्या महत्व है?
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया की सबसे महत्वपूर्ण समुद्री लाइफलाइन है, जिससे दुनिया का लगभग 20% कच्चा तेल और एलएनजी(Hormuz Crisis) की सप्लाई होती है। इसके अलावा, भारत अपने कुल ‘नॉन-ऑयल एक्सपोर्ट’ का 10% से अधिक हिस्सा इसी रास्ते से भेजता है।
भारत पर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के बंद होने का क्या प्रभाव पड़ेगा?
भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए भारी मात्रा में इस मार्ग पर निर्भर है। यदि यहां सप्लाई रुकती है, तो कच्चे तेल की कीमतें बढ़ेंगी, जिससे भारत में पेट्रोल, डीजल और सीएनजी-पीएनजी के दाम बढ़ सकते हैं, जो अंततः देश की महंगाई और विकास दर को प्रभावित करेगा।
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