तीसरी तिमाही में 7.8% की दमदार GDP ग्रोथ
नई दिल्ली: सांख्यिकी मंत्रालय ने अब GDP की गणना के लिए आधार वर्ष को 2011-12 से बदलकर(Indian Economy) 2022-23 कर दिया है। इस बदलाव का मुख्य उद्देश्य आधुनिक अर्थव्यवस्था के नए घटकों जैसे डिजिटल ट्रांजेक्शन (UPI), ई-कॉमर्स और गिग इकोनॉमी को शामिल करना है। नई सीरीज के अनुसार, अक्टूबर-दिसंबर तिमाही में रियल जीडीपी 84.54 लाख करोड़ रुपए रही। आधार वर्ष बदलने से डेटा में सटीकता आती है क्योंकि यह महंगाई के प्रभाव को हटाकर वास्तविक उत्पादन वृद्धि को दर्शाता है।
समावेशी गणना: अब कुक और ड्राइवर की कमाई भी शामिल
इस बार की GDP रिपोर्ट की सबसे बड़ी विशेषता इसकी व्यापकता है। आर्थिक अनुमानों को जमीनी हकीकत के करीब लाने के लिए इसमें पहली बार घरों में काम करने वाले कुक, ड्राइवर और घरेलू सहायकों की सेवाओं के डेटा को जोड़ा गया है। इसके अलावा, GST नेटवर्क और ई-वाहन(Indian Economy) डेटाबेस का उपयोग भी गणना में किया गया है। यह दर्शाता है कि असंगठित क्षेत्र का योगदान अब आधिकारिक तौर पर देश की आर्थिक प्रगति का हिस्सा बन रहा है, जिससे नीतियां बनाने में सरकार को अधिक स्पष्टता मिलेगी।
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वैश्विक चुनौतियों पर घरेलू मांग की जीत
यह विकास दर तब हासिल हुई है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने भारत पर 50% टैरिफ लगाने जैसे कड़े कदम उठाए हैं। वैश्विक अनिश्चितता और व्यापारिक दबाव के बावजूद 7.8% की वृद्धि यह प्रमाणित करती है कि भारत की घरेलू मांग (Domestic Demand) और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर अत्यंत सुदृढ़ हैं। सरकार ने अब पूरे वित्त वर्ष 2025-26 के लिए विकास दर का अनुमान बढ़ाकर 7.6% कर दिया है, जो पिछले वर्ष के 7.1% से काफी अधिक है।
GDP की गणना में ‘रियल जीडीपी’ और ‘नॉमिनल जीडीपी’ के बीच क्या अंतर है?
रियल जीडीपी की गणना एक ‘आधार वर्ष’ (जैसे अब 2022-23) की स्थिर कीमतों पर की जाती है, जो वास्तविक उत्पादन वृद्धि दिखाती है। वहीं, नॉमिनल जीडीपी मौजूदा बाजार कीमतों पर आधारित होती है और इसमें महंगाई (Inflation) भी शामिल होती है।
आधार वर्ष को 2011-12 से बदलकर 2022-23 क्यों किया गया?
पुराना पैमाना 14 साल पुराना हो चुका था, जिसमें आधुनिक बदलाव जैसे जोमैटो, ओटीटी और डिजिटल इंडिया शामिल नहीं थे। 2022-23 को इसलिए चुना गया क्योंकि यह एक ‘सामान्य’ साल था जब कोरोना का प्रभाव खत्म हो चुका था और अर्थव्यवस्था स्थिर थी।
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