DGCA आंकड़ों से बदला बाजार समीकरण
नई दिल्ली:भारत(India) की सबसे बड़ी एयरलाइन इंडिगो(IndiGo) की घरेलू बाजार पकड़ में कमजोरी के संकेत मिलने लगे हैं। डीजीसीए(DGCA) के ताजा आंकड़ों के अनुसार नवंबर 2025 में कंपनी की बाजार हिस्सेदारी में साफ गिरावट दर्ज की गई है। यह गिरावट ऐसे समय सामने आई है जब देश में हवाई यात्रियों की संख्या लगातार बढ़ रही है। इसके बावजूद इंडिगो अब भी यात्रियों के लिहाज से शीर्ष एयरलाइन बनी हुई है।
नई दिल्ली(New Delhi) में जारी रिपोर्ट बताती है कि नवंबर के दौरान इंडिगो की हिस्सेदारी 63.6 प्रतिशत पर आ गई। यह पूरे साल का सबसे निचला स्तर माना जा रहा है। हालांकि इस गिरावट ने एविएशन सेक्टर में प्रतिस्पर्धा को और तेज कर दिया है। अन्य एयरलाइनों के लिए यह मौका बनता दिख रहा है कि वे अपनी पकड़ मजबूत कर सकें।
बाजार हिस्सेदारी में बदलाव की तस्वीर
अक्टूबर 2025 में इंडिगो की घरेलू बाजार हिस्सेदारी 65.6 प्रतिशत थी, जो नवंबर में घटकर 63.6 प्रतिशत रह गई। साल 2025 में यह पहला मौका है जब कंपनी की हिस्सेदारी इस स्तर तक फिसली है। इस गिरावट ने निवेशकों और यात्रियों दोनों का ध्यान खींचा है।
जनवरी से सितंबर 2025 तक इंडिगो की हिस्सेदारी 63.7 से 65.2 प्रतिशत के बीच बनी रही। मई और अक्टूबर जैसे महीनों में कंपनी ने मजबूत प्रदर्शन दिखाया था। मगर नवंबर में आई अचानक गिरावट ने यह संकेत दिया कि परिचालन चुनौतियां असर दिखा रही हैं।
संचालन समस्याएं और नियामकीय सख्ती
नवंबर महीने में इंडिगो की उड़ानों में रिकॉर्ड संख्या में रद्दीकरण दर्ज हुए। उड़ानों में देरी और शेड्यूल गड़बड़ी को लेकर यात्रियों की शिकायतें भी बढ़ीं। इसके बाद एविएशन नियामक ने सर्दियों के शेड्यूल में 10 प्रतिशत कटौती का निर्देश दिया।
इस फैसले का सीधा असर कंपनी की क्षमता और समयबद्ध संचालन पर पड़ा। कई यात्रियों ने वैकल्पिक एयरलाइनों की ओर रुख किया। इसी कारण बाजार हिस्सेदारी में गिरावट को परिचालन दबाव से जोड़कर देखा जा रहा है।
प्रतिस्पर्धियों को मिला फायदा
इसी अवधि में एयर इंडिया ग्रुप की स्थिति मजबूत होती नजर आई। नवंबर 2025 में एयर इंडिया और एयर इंडिया एक्सप्रेस की संयुक्त हिस्सेदारी बढ़कर 26.7 प्रतिशत हो गई। स्पाइसजेट ने भी अपनी बाजार पकड़ में सुधार किया।
दूसरी ओर कुछ बजट एयरलाइनों की हिस्सेदारी में हल्की गिरावट देखी गई। इसके बावजूद कुल घरेलू यात्री संख्या में लगातार इजाफा जारी रहा। जनवरी से नवंबर 2025 के बीच यात्रियों की संख्या में सालाना आधार पर 4.26 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज हुई।
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बढ़ती शिकायतें बनी चुनौती
हवाई यात्राओं के विस्तार के साथ यात्रियों की शिकायतें भी बढ़ी हैं। नवंबर में एयरलाइनों के खिलाफ कुल 1,196 शिकायतें दर्ज की गईं। इनमें आधे से अधिक शिकायतें उड़ान में देरी और रद्दीकरण से जुड़ी थीं।
सामान और रिफंड से संबंधित शिकायतों की संख्या भी उल्लेखनीय रही। यह संकेत देता है कि सेवा गुणवत्ता अब एयरलाइनों के लिए सबसे बड़ी परीक्षा बनती जा रही है।
इंडिगो की बाजार हिस्सेदारी में गिरावट का मुख्य कारण क्या है
उड़ानों में देरी, रद्दीकरण और परिचालन समस्याओं ने यात्रियों के भरोसे को प्रभावित किया। नियामकीय सख्ती के चलते शेड्यूल कटौती भी करनी पड़ी। इन कारणों से कुछ यात्रियों ने दूसरी एयरलाइनों को चुना।
अन्य एयरलाइनों को इससे क्या लाभ मिला
एयर इंडिया ग्रुप और स्पाइसजेट जैसी कंपनियों की बाजार हिस्सेदारी में बढ़ोतरी हुई। यात्रियों के विकल्प बढ़ने से प्रतिस्पर्धा तेज हुई। इससे सेवा सुधार की उम्मीद भी बढ़ी है।
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