एलपीजी आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए इमरजेंसी कदम
नई दिल्ली: मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के कारण भारत सरकार ने ‘इमरजेंसी पावर’ का उपयोग करते हुए सभी तेल रिफाइनरियों को एलपीजी (LPG) का उत्पादन बढ़ाने का आदेश दिया है। अब रिफाइनरी(Refinery) कंपनियों को अपने प्रोपेन और ब्यूटेन स्टॉक का उपयोग केवल रसोई गैस बनाने के लिए करना होगा, न कि पेट्रोकेमिकल्स (जैसे प्लास्टिक) के उत्पादन के लिए। यह आदेश मुख्य रूप से इंडियन ऑयल, एचपीसीएल और बीपीसीएल जैसी सरकारी कंपनियों की आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने के लिए दिया गया है ताकि देश के 33.2 करोड़ सक्रिय एलपीजी उपभोक्ताओं को सिलेंडर की कमी न हो।
पेट्रोकेमिकल उत्पादन और मुनाफे पर प्रभाव
सरकार(Government) के इस निर्देश का सीधा असर रिलायंस इंडस्ट्रीज जैसी निजी कंपनियों पर पड़ रहा है, क्योंकि प्रोपेन और ब्यूटेन के डायवर्जन से अल्काइलेट्स का उत्पादन घट जाएगा। उद्योग विशेषज्ञों के अनुसार, पेट्रोकेमिकल उत्पादों की बाजार कीमत एलपीजी के मुकाबले अधिक (LPG) होती है, इसलिए इस फैसले से कंपनियों के मार्जिन और मुनाफे पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है। हालांकि, देश की ऊर्जा सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए सरकार ने पेट्रोकेमिकल के बजाय घरेलू गैस उपलब्धता सुनिश्चित करने को अनिवार्य कर दिया है।
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कतर से आपूर्ति बाधित और बढ़ती चुनौतियां
भारत के लिए सबसे बड़ी चुनौती कतर से आने वाली एलएनजी (LPG) आपूर्ति में 40% की कटौती है, क्योंकि ‘रास लफान’ प्लांट पर ड्रोन हमले के बाद वहां उत्पादन रुक गया है। ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ के असुरक्षित होने के कारण वहां से गुजरने वाले जहाजों की संख्या में भारी कमी आई है। सिटी गैस वितरण (CGD) कंपनियों ने चेतावनी दी है कि यदि उन्हें ‘स्पॉट मार्केट’ से महंगी गैस खरीदनी पड़ी, तो सीएनजी (CNG) और पीएनजी (PNG) की कीमतें बढ़ सकती हैं, जिससे उपभोक्ताओं का रुख इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) की ओर हो सकता है।
सरकार ने रिफाइनरी कंपनियों को प्रोपेन और ब्यूटेन के उपयोग पर क्या निर्देश दिए हैं?
सरकार ने निर्देश दिया है कि कंपनियां प्रोपेन और ब्यूटेन का उपयोग पेट्रोकेमिकल्स (प्लास्टिक आदि) के बजाय केवल रसोई गैस (LPG) बनाने के लिए करेंगी। यह सुनिश्चित करने के लिए किया गया है कि देश में रसोई गैस सिलेंडर की आपूर्ति निर्बाध बनी रहे।
‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ का भारत के लिए क्या महत्व है और वहां क्या समस्या उत्पन्न हुई है?
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज एक महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है, जिससे भारत अपनी जरूरत का 50% कच्चा तेल और 54% एलएनजी आयात करता है। ईरान-इजराइल जंग के कारण यह क्षेत्र असुरक्षित हो गया है, जिससे वहां से गुजरने वाले जहाजों की संख्या 91 से घटकर 26 रह गई है, जिससे भारत की ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हो रही है।
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