తెలుగు | Epaper

Oil Deal: भारत-रूस तेल डील: अमेरिकी राहत और ऊर्जा सुरक्षा

Dhanarekha
Dhanarekha
Oil Deal: भारत-रूस तेल डील: अमेरिकी राहत और ऊर्जा सुरक्षा

अमेरिकी लाइसेंस और राहत की शर्तें

नई दिल्ली: अमेरिकी ट्रेजरी विभाग द्वारा भारतीय रिफाइनरियों(Oil Deal) को 3 अप्रैल, 2026 तक के लिए एक विशेष 30-दिवसीय लाइसेंस प्रदान किया गया है। यह अस्थायी छूट राष्ट्रपति ट्रम्प के ऊर्जा एजेंडे(Energy Agenda) का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य वैश्विक तेल बाजार में स्थिरता बनाए रखना है। हालांकि, इस रियायत के तहत भारत केवल उन्हीं रूसी तेल टैंकरों की डिलीवरी ले सकेगा जो 5 मार्च तक जहाजों पर लोड हो चुके थे। इस कदम से भारतीय बाजारों में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में तत्काल वृद्धि का खतरा टल गया है

मिडिल-ईस्ट तनाव और रणनीतिक विकल्प

ईरान(Iran) और इजराइल के बीच बढ़ते संघर्ष के कारण ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ में बाधा उत्पन्न हुई है, जहाँ से दुनिया की लगभग 20% तेल आपूर्ति होती है। कच्चे तेल(Oil Deal) की कीमतें 84 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुँचने और प्रमुख रिफाइनरियों पर हमलों ने वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा को संकट में डाल दिया है। ऐसी स्थिति में भारत के लिए रूस एक सुरक्षित और सस्ता विकल्प बनकर उभरा है। वर्तमान में लगभग 95 लाख बैरल रूसी तेल एशियाई जल क्षेत्र में मौजूद है, जिसे भारत कम लागत और समय में प्राप्त कर सकता है।

भारतीय अर्थव्यवस्था पर प्रभाव और भविष्य की राह

भारत अपनी तेल जरूरतों का लगभग 88% आयात करता है, इसलिए रियायती दरों पर रूसी तेल की उपलब्धता घरेलू महंगाई को नियंत्रित रखने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के अनुसार, समुद्री व्यापार(Oil Deal) मार्गों में अस्थिरता वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए ‘न्यू नॉर्मल’ बनती जा रही है। अमेरिका को उम्मीद है कि इस छूट के बाद भारत अमेरिकी तेल की खरीद में भी तेजी लाएगा, जिससे रूस पर निर्भरता और ईरान के क्षेत्रीय प्रभाव को संतुलित किया जा सके।

अमेरिका द्वारा भारत को रूसी तेल खरीदने के लिए दी गई छूट का मुख्य उद्देश्य क्या है?

इसका मुख्य उद्देश्य वैश्विक तेल बाजार में सप्लाई को स्थिर रखना और ईरान-इजराइल युद्ध के कारण तेल की कीमतों में होने वाली अत्यधिक वृद्धि को रोकना है, ताकि भारत जैसे मित्र देशों की अर्थव्यवस्था पर बुरा असर न पड़े।

‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ में तनाव का भारत पर क्या असर पड़ता है?

चूंकि दुनिया की 20% और भारत की ऊर्जा आपूर्ति का एक बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से गुजरता है, यहाँ किसी भी तरह की रुकावट से तेल की कमी हो सकती है और देश में पेट्रोल-डीजल के दाम तेजी से बढ़ सकते हैं।

अन्य पढ़े:

📢 For Advertisement Booking: 98481 12870