Rupee: रुपये की गिरावट से बढ़ी चिंता

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डॉलर के दबाव में भारतीय मुद्रा

नई दिल्ली: डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया(Rupee) लगातार कमजोर होता जा रहा है, जिससे बाजार और आम लोगों की चिंता बढ़ गई है। नई दिल्ली में आर्थिक विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यदि यही स्थिति बनी रही तो रुपया(Rupee) जल्द ही 100 प्रति डॉलर के स्तर तक पहुंच सकता है। भारत(India) की अर्थव्यवस्था पर इसका असर महंगाई, निवेश और आयात लागत के रूप में दिखाई देने लगा है। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक तनाव और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें इस गिरावट की बड़ी वजह हैं।

मुंबई(Mumbai) के शेयर बाजार और विदेशी निवेशकों की गतिविधियों पर भी इसका असर दिख रहा है। अमेरिका और पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण विदेशी निवेशक सुरक्षित बाजारों की ओर रुख कर रहे हैं। इसके साथ ही भारत का आयात बिल लगातार बढ़ रहा है, जिससे रुपये पर दबाव और ज्यादा बढ़ता दिखाई दे रहा है

तेल कीमतों और निवेश निकासी का असर

कच्चे तेल की कीमतों में उछाल भारतीय मुद्रा पर भारी दबाव डाल रहा है क्योंकि देश अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से आयात करता है। विदेशी निवेशकों द्वारा भारतीय बाजार से पैसा निकालने से डॉलर की मांग तेजी से बढ़ी है। इसी कारण रुपया रिकॉर्ड निचले स्तरों के करीब पहुंच गया है। बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि यदि यह स्थिति लंबी चली तो शेयर बाजार में भी अस्थिरता बढ़ सकती है।

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आम लोगों और उद्योगों पर प्रभाव

रुपये(Rupee) की कमजोरी से पेट्रोल, इलेक्ट्रॉनिक्स, रसायन और आयातित वस्तुएं महंगी हो सकती हैं। परिवहन और विनिर्माण लागत बढ़ने से रोजमर्रा के सामान की कीमतों में भी असर दिखाई देगा। दूसरी ओर आरबीआई महंगाई को नियंत्रित करने के लिए ब्याज दरें बढ़ा सकता है, जिससे लोन महंगे होने की संभावना है। विमानन, ऑटोमोबाइल और तेल कंपनियों पर इसका सबसे अधिक दबाव पड़ने की आशंका जताई जा रही है।

रुपये की गिरावट से सबसे ज्यादा असर किस पर पड़ेगा?

कमजोर रुपये का असर आम उपभोक्ताओं और आयात आधारित उद्योगों पर सबसे ज्यादा पड़ेगा। पेट्रोल, मोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक सामान और कई जरूरी उत्पाद महंगे हो सकते हैं। इससे घरेलू बजट पर अतिरिक्त बोझ बढ़ सकता है।

क्या रुपया 100 प्रति डॉलर तक पहुंच सकता है?

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि विदेशी निवेश निकासी और तेल कीमतों में तेजी जारी रही तो यह संभावना बढ़ सकती है। हालांकि आरबीआई और सरकारी कदम स्थिति को नियंत्रित करने की कोशिश कर सकते हैं। बाजार की स्थिरता आने वाले महीनों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

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Dhanarekha

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