अब डीजल और हाइब्रिड कारें खरीदना होगा महंगा
नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने प्लैटिनम(Platinum) पर प्रभावी आयात शुल्क(Import Duty) को 6.4% से बढ़ाकर 15.4% कर दिया है। इस फैसले का सीधा असर ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री पर पड़ेगा, क्योंकि प्लैटिनम का इस्तेमाल गाड़ियों के प्रदूषण नियंत्रण सिस्टम (कैटालिटिक कन्वर्टर्स) में होता है। जानकारों के मुताबिक, कंपनियां इस बढ़ी हुई लागत का बोझ ग्राहकों पर डाल सकती हैं। इससे मिड-साइज डीजल एसयूवी के दाम ₹12,000 तक और स्ट्रॉन्ग हाइब्रिड कारों की कीमतें ₹18,000 तक बढ़ सकती हैं। यहाँ तक कि एंट्री-लेवल पेट्रोल कारें भी ₹4,000 तक महंगी होने की उम्मीद है।
प्रमुख कंपनियां और मॉडल: कौन होगा सबसे ज्यादा प्रभावित?
नीति आयोग के पूर्व निदेशक रणधीर सिंह के अनुसार, टाटा मोटर्स, महिंद्रा और टोयोटा जैसी कंपनियां इस बदलाव से सबसे ज्यादा प्रभावित होंगी। महिंद्रा(Mahindra) की लोकप्रिय एसयूवी जैसे स्कॉर्पियो-एन, थार और एक्सयूवी-700 के निर्माण की लागत बढ़ जाएगी। वहीं, मारुति और टोयोटा की हाइब्रिड गाड़ियों में इंजन बार-बार स्टार्ट-स्टॉप होने के कारण इनके फिल्टर में अधिक प्लैटिनम की खपत होती है, जिससे इनकी कीमतें बढ़ना तय है। भारी वाहनों (कमर्शियल वाहनों) में प्लैटिनम की खपत 20 ग्राम से अधिक होती है, इसलिए ट्रक और बसें भी काफी महंगी हो सकती हैं।
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रिसाइकिलिंग से राहत और इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) को बढ़ावा
सरकार ने एक ओर टैक्स बढ़ाया है, तो दूसरी ओर ‘सर्कुलर इकोनॉमी’ को बढ़ावा देने के लिए पुराने और खराब फिल्टर मंगाने पर टैक्स घटाकर 4.35% कर दिया है। इससे पुराने साइलेंसर से प्लैटिनम निकालकर उसे दोबारा इस्तेमाल करना सस्ता होगा। इस कदम से देश में रिसाइकिलिंग इंडस्ट्री को मजबूती मिलेगी। इसके अलावा, डीजल और हाइब्रिड कारों के महंगे होने से ग्राहकों की दिलचस्पी इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (EV) की ओर बढ़ सकती है, क्योंकि ईवी में प्रदूषण नियंत्रण के लिए प्लैटिनम की आवश्यकता नहीं होती है।
गाड़ियों के निर्माण में प्लैटिनम का उपयोग क्यों किया जाता है?
प्लैटिनम का उपयोग मुख्य रूप से गाड़ियों के साइलेंसर फिल्टर (कैटालिटिक कन्वर्टर) में किया जाता है। यह इंजन से निकलने वाली जहरीली गैसों को फिल्टर कर प्रदूषण कम करने में मदद करता है, जो बीएस-6 (BS-6) मानकों को पूरा करने के लिए अनिवार्य है।
हाइब्रिड कारों पर प्लैटिनम ड्यूटी का असर अन्य कारों से अधिक क्यों पड़ रहा है?
स्ट्रॉन्ग हाइब्रिड कारों में पेट्रोल इंजन बार-बार चालू और बंद होता है। इस प्रक्रिया में उत्सर्जन को नियंत्रित करने के लिए उनके फिल्टर में अधिक मात्रा में (लगभग 10-15 ग्राम) प्लैटिनम की आवश्यकता होती है, इसीलिए उनकी लागत डीजल या पेट्रोल कारों की तुलना में ज्यादा बढ़ रही है।
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