इस साल 133% की भारी तेजी, सोने की कीमतों में मामूली गिरावट
नई दिल्ली: भारतीय बाजार में चांदी(Silver) ने इस हफ्ते एक नया इतिहास रच दिया है। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के अनुसार, चांदी की कीमत पहली बार ₹2,00,000 प्रति किलो के मनोवैज्ञानिक स्तर को पार कर गई है। महज एक हफ्ते के भीतर इसमें ₹4,887 की तेजी आई है। अगर साल 2024 के अंत से तुलना करें, तो चांदी की कीमतों में अब तक 132.59% का जबरदस्त उछाल देखा गया है। औद्योगिक मांग, विशेषकर सोलर पैनल और इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) में चांदी के बढ़ते उपयोग ने इसकी कीमतों को पंख लगा दिए हैं।
सोने के भाव में गिरावट और ऑल-टाइम हाई
जहां एक तरफ चांदी(Silver) रिकॉर्ड बना रही है, वहीं सोने की कीमतों में लगातार तीन हफ्तों की तेजी के बाद इस हफ्ते गिरावट दर्ज की गई है। हफ्ते भर में सोना ₹931 प्रति 10 ग्राम सस्ता होकर ₹1,31,779 पर आ गया है। हालांकि, इसी हफ्ते 15 दिसंबर को सोने ने ₹1,33,249 का अपना अब तक का सबसे उच्चतम स्तर भी छुआ था। सोने की कीमतों में आई इस साल भर की तेजी (लगभग 73%) के पीछे कमजोर होता डॉलर, रूस-यूक्रेन युद्ध जैसा भू-राजनीतिक तनाव और केंद्रीय बैंकों द्वारा की जा रही भारी खरीदारी मुख्य कारण रहे हैं।
कीमतें बढ़ने के पीछे के प्रमुख कारण और सावधानियां
विशेषज्ञों के अनुसार, चांदी(Silver) की कीमतों में तेजी का सबसे बड़ा कारण अमेरिका में ट्रंप सरकार की टैरिफ नीतियों का डर है, जिसकी वजह से कंपनियां भारी स्टॉक जमा कर रही हैं। वहीं, सोने में तेजी सुरक्षित निवेश की मांग के कारण बनी हुई है। आम उपभोक्ताओं के लिए सलाह दी गई है कि वे सोना खरीदते समय ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड (BIS) का हॉलमार्क जरूर चेक करें। साथ ही, अलग-अलग शहरों में मेकिंग चार्ज और GST के कारण कीमतों में अंतर हो सकता है, इसलिए खरीदारी से पहले IBJA की वेबसाइट से बेस रेट क्रॉस-चेक करना फायदेमंद रहता है।
चांदी की कीमतों में सोने के मुकाबले अधिक तेजी (133%) क्यों देखी जा रही है?
चांदी(Silver) अब केवल एक कीमती धातु नहीं बल्कि एक आवश्यक ‘इंडस्ट्रियल कमोडिटी’ बन गई है। सोलर एनर्जी, इलेक्ट्रॉनिक्स और इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) के बढ़ते बाजार में चांदी का भारी इस्तेमाल हो रहा है। औद्योगिक मांग में अचानक आई तेजी और ग्लोबल सप्लाई में कमी के कारण चांदी ने इस साल सोने के मुकाबले कहीं अधिक रिटर्न दिया है।
अलग-अलग शहरों में सोने के रेट में अंतर क्यों होता है?
IBJA द्वारा जारी किए गए बेस रेट में 3% GST, मेकिंग चार्ज और ज्वेलर्स का अपना मुनाफा (मार्जिन) शामिल नहीं होता। हर शहर के ज्वेलर्स एसोसिएशन अपने स्थानीय टैक्स, परिवहन लागत और मेकिंग चार्ज के आधार पर रेट तय करते हैं, इसलिए मुंबई, दिल्ली या आपके शहर में कीमतों में अंतर दिखाई देता है।
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