Silver: चांदी की रिकॉर्ड उड़ान

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क्या ₹4 लाख की ओर बढ़ रहे हैं दाम?

नई दिल्ली: चांदी(Silver) की कीमतों में उछाल का सबसे बड़ा कारण औद्योगिक मांग (Industrial Demand) है। सौर ऊर्जा, इलेक्ट्रिक वाहन (EV) और 5G तकनीक में चांदी का अनिवार्य रूप से उपयोग हो रहा है। इसके साथ ही, चांदी की आपूर्ति सीमित है क्योंकि यह मुख्य रूप से तांबे और जस्ता के खनन के दौरान एक ‘बाय-प्रोडक्ट’ के रूप में निकलती है। जब तक अन्य धातुओं का खनन नहीं बढ़ता, चांदी की कमी बनी रहेगी, जो कीमतों को ऊपर ले जा रही है

एक्सपर्ट्स की राय और भविष्य का अनुमान

बाजार विशेषज्ञों और मोतीलाल ओसवाल जैसी वित्तीय संस्थाओं का मानना है कि चांदी में निवेश का यह सही समय हो सकता है। जानकारों के अनुसार, 2026 तक चांदी(Silver) ₹3.20 लाख से ₹4 लाख प्रति किलो के स्तर को छू सकती है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर डॉलर इंडेक्स में गिरावट और भू-राजनीतिक तनाव भी निवेशकों को सुरक्षित निवेश के रूप में चांदी की ओर आकर्षित कर रहे हैं।

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निवेश के सुरक्षित और आधुनिक विकल्प

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यदि आप चांदी(Silver) में निवेश करना चाहते हैं, तो अब केवल भौतिक चांदी (सिक्के या ईंट) तक सीमित रहने की जरूरत नहीं है। सिल्वर ETF (Exchange Traded Funds) एक बेहतरीन विकल्प है, जहाँ आप बिना फिजिकल स्टोरेज की चिंता किए शेयर बाजार के माध्यम से चांदी खरीद सकते हैं। इसके अलावा, जोखिम लेने वाले निवेशक MCX पर सिल्वर फ्यूचर्स में ट्रेड कर सकते हैं, जबकि लंबी अवधि के लिए हॉलमार्क वाले सिक्के खरीदना सबसे सुरक्षित माना जाता है।

क्या चांदी की कीमतों में गिरावट आने की कोई संभावना है?

कमोडिटी बाजार में उतार-चढ़ाव सामान्य है। हालांकि लंबी अवधि का ट्रेंड तेजी का दिख रहा है, लेकिन वैश्विक आर्थिक सुधार या डॉलर के अचानक मजबूत होने पर कीमतों में कुछ समय के लिए ‘करेक्शन’ या मामूली गिरावट आ सकती है। विशेषज्ञों की सलाह है कि हर गिरावट पर खरीदारी करना फायदेमंद हो सकता है।

सिल्वर ईटीएफ में निवेश करना भौतिक चांदी से बेहतर क्यों है?

सिल्वर ईटीएफ में निवेश करने पर आपको चांदी की शुद्धता की चिंता नहीं करनी पड़ती और न ही इसे लॉकर में रखने का कोई अतिरिक्त खर्च (Storage Cost) देना होता है। आप इसे अपने डिमैट अकाउंट से कभी भी मार्केट रेट पर बेच सकते हैं, जिससे इसमें लिक्विडिटी (पैसे की उपलब्धता) अधिक रहती है।

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